पाकिस्तान, सऊदी अरब व तुर्किये ने किया रक्षा समझौता, एक पर हमला होने पर तीनों मिलकर देंगे जवाब

07 Aug 2026 19:04:53
मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के दाैरान तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन, सऊदी अरब के किंग सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मुहम्मद शहबाज़ शरीफ


पाकिस्तान विदेश मंत्रालय द्वारा पत्र


रियाद, 07 अगस्त (हि.स.)। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने मक्का में आयोजित शिखर सम्मेलन के दौरान शुक्रवार को ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ पर हस्ताक्षर किए। समझौते का उद्देश्य तीनों देशों के बीच सामूहिक सुरक्षा, रक्षा सहयोग और किसी भी संभावित आक्रमण के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करना है।

तुर्किये की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू तथा अन्य मीडिया रिपाेर्ट के मुताबिक यह समझौता शुक्रवार को मक्का में आयोजित मक्का अल-मुकर्रमा शिखर सम्मेलन के दौरान हुआ। शिखर सम्मेलन सऊदी अरब के सुल्तान सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद के निमंत्रण पर आयोजित किया गया, जिसमें तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने हिस्सा लिया। सऊदी अरब के युवराज एवं प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान ने मक्का स्थित अल-सफा पैलेस में दोनों नेताओं का स्वागत किया।

बैठक के दौरान तीनों देशों के नेताओं ने त्रिपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा, रक्षा सहयोग और साझा रणनीतिक हितों पर व्यापक चर्चा की। इसके बाद ऐतिहासिक संबंधों, इस्लामी एकजुटता और आपसी सहयोग को आधार बनाते हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

समझौते के अनुसार, तीनों देश सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेंगे तथा क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर शांति, सुरक्षा एवं स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए मिलकर कार्य करेंगे। समझौते का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि यदि सदस्य देशों में से किसी एक पर हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा और उसके अनुरूप तीनों मिलकर जवाब देंगे।

इसके अलावा समझौते में रक्षा सहयोग के सभी क्षेत्रों को विस्तार देने, सामूहिक प्रतिरोध क्षमता को सशक्त बनाने और साझा सुरक्षा तंत्र को विकसित करने का भी प्रावधान किया गया है। तीनों देशों ने इस समझौते को क्षेत्रीय स्थिरता और साझा सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण पहल बताया है।

उल्लेखनीय है कि सात अक्टूबर 2023 को इज़राइल पर हमास के हमले के बाद से लगभग तीन सालों से पश्चिम एशिया में तनाव और हिंसा का माहौल है। इस क्षेत्र के लगभग हर देश को सीमा-पार हमलों या मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा है। इज़राइल ने गाज़ा में युद्ध छेड़ा है, दक्षिणी लेबनान में घुसपैठ की है और सीरिया में भी कुछ इलाकों पर कब्ज़ा किया है, साथ ही ईरान के खिलाफ दो हवाई हमले भी किए हैं। तेहरान ने सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, जॉर्डन और इज़राइल में अमेरिकी ठिकानों और आम नागरिकों से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं पर हमले किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह समझौता तीनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे त्रिपक्षीय सैन्य संबंधों पर आधारित है। पाकिस्तान और तुर्किये मज़बूत रक्षा उद्योग लेकर आते हैं, जबकि सऊदी अरब तकनीकी खर्च के ज़रिए योगदान दे सकता है। हालांकि जानकाराें का मानना है कि इस समझौते में परमाणु पहलू शामिल होने की संभावना नहीं है, क्योंकि पाकिस्तान की परमाणु प्रतिरोध क्षमता मुख्य रूप से भारत से मिलने वाले खतरे पर केंद्रित है।

पाकिस्तान दशकों से सऊदी सेना को प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता देता रहा है, जबकि तुर्किये और पाकिस्तान ने युद्धपोतों और प्रशिक्षण विमानों का आदान-प्रदान किया है। वर्ष 2023 में सऊदी अरब तुर्किये के ड्रोन खरीदने पर सहमत हुआ, जिसे सबसे बड़ा रक्षा निर्यात अनुबंध बताया गया था।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

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