
नई दिल्ली, 01 सितंबर (हि.स.)। मॉम्स बिलीफ ब्रैंड नेम से ऑटिज्म और एडीएचडी पीड़ित बच्चों के लिए थेरेपी और मेडिकेयर सुविधा उपलब्ध कराने वाली कंपनी रेज ऑफ बिलीफ लिमिटेड का 125 करोड़ रुपये का आईपीओ आज सब्सक्रिप्शन के लिए लॉन्च कर दिया गया। इस आईपीओ में तीन सितंबर तक बोली लगाई जा सकती है। इश्यू की क्लोजिंग के बाद चार सितंबर को शेयरों का अलॉटमेंट किया जाएगा, जबकि सात सितंबर को अलॉटेड शेयर डीमैट अकाउंट में क्रेडिट कर दिए जाएंगे। कंपनी के शेयर आठ सितंबर को बीएसई और एनएसई पर लिस्ट हो सकते हैं। लॉन्चिंग के बाद पहले दिन यह आईपीओ 1.18 गुना सब्सक्राइब हो गया है।
इस आईपीओ में बोली लगाने के लिए 227 रुपये से लेकर 239 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है, जबकि लॉट साइज 62 शेयर का है। इस आईपीओ में रिटेल इनवेस्टर्स कम से कम एक लॉट यानी 62 शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं, जिसके लिए उन्हें 14,818 रुपये का निवेश करना होगा। इसी तरह रिटेल इनवेस्टर 1,92,634 रुपये के निवेश से अधिकतम 13 लॉट में 806 शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं। इस आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 52.30 लाख नए शेयर जारी किए जा रहे हैं।
इस आईपीओ में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए 75 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व किया गया है। इसके अलावा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 10 प्रतिशत हिस्सा और नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (एनआईआई) के लिए 15 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व है। इस इश्यू के लिए मेफकॉम कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड को बुक रनिंग लीड मैनेजर बनाया गया है, जबकि केफिन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड को रजिस्ट्रार बनाया गया है।
रेज ऑफ बिलीफ की वित्तीय स्थिति की बात करें तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत मामूली उतार चढ़ाव के बावजूद मजबूत बनी रही है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी को 85 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 5.88 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में ये फिसल कर 4.96 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।
इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में भी लगातार बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में इसे 30.76 करोड़ रुपये का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 36.54 करोड़ रुपये और 2025-26 में उछल कर 82.06 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।
कंपनी पर लदे कर्ज के बोझ की बात करें ते वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी पूरी तरह से कर्ज मुक्त थी। इसके बाद वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी पर 4.36 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ आ गया। इसके अगले वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें, तो इस वित्त वर्ष के दौरान कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ थोड़ा कम होकर 3.61 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।
कंपनी का रिजर्व और सरप्लस भी इस अवधि में लगातार बढ़ता गया। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 5.78 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो वित्त वर्ष वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 15.02 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह अगर पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो इस साल कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 15.22 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
इस अवधि में कंपनी के नेटवर्थ में भी लगातार बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी का नेटवर्थ 5.78 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 15.02 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का नेटवर्थ दोगुने से अधिक की उछाल के साथ 30.81 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।
इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2023-24 में 1.49 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 3.02 करोड़ रुपये के स्तर पर और पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में 11.91 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक