चित्रकूट में जलमग्न घाट और कीचड़ भरे रास्ते भी नहीं रोक सके श्रद्धालुओं के कदम

11 Sep 2026 20:01:53
भदई अमावस्या पर चित्रकूट में बाढ़ और बदहाल रास्तों के बीच उमड़ा आस्था का सैलाब, कामतानाथ के दर्शन और पांच किमी परिक्रमा में गूंजा ‘जय श्रीराम’


चित्रकूट में भक्तों का अभिवादन करते पुलिस अधिकारी एवं अन्य


भदई अमावस्या पर चित्रकूट में बाढ़ और बदहाल रास्तों के बीच उमड़ा आस्था का सैलाब, कामतानाथ के दर्शन और पांच किमी परिक्रमा में गूंजा ‘जय श्रीराम’


-भदई अमावस्या पर चित्रकूट में बाढ़ और बदहाल रास्तों के बीच उमड़ा आस्था का सैलाब

चित्रकूट, 11 सितंबर (हि.स.)। मंदाकिनी की उफनती धार, जलमग्न घाट, कीचड़ और मलबे से पटे रास्ते तथा जगह-जगह प्रशासनिक बंदिशें भी शुक्रवार को श्रद्धालुओं की आस्था के आगे बौनी नजर आईं। भदई अमावस्या के पावन अवसर पर भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में ऐसा आस्था का सैलाब उमड़ा कि बाढ़ की विभीषिका भी भक्तों के कदम नहीं रोक सकी। भोर होते ही रामघाट से कामदगिरि तक श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। मंदाकिनी स्नान, कामतानाथ दर्शन और करीब पांच किलोमीटर लंबी कामदगिरि परिक्रमा के दौरान पूरा चित्रकूट ‘जय श्रीराम’ और ‘कामतानाथ सरकार की जय’ के जयघोष से गूंजता रहा।

भारी बारिश के बाद मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने से रामघाट की कई सीढ़ियां पानी में डूबी रहीं। नदी किनारे की दुकानें और छोटे मंदिर भी बाढ़ की चपेट में आए। घाटों और संपर्क मार्गों पर कीचड़ व मलबा जमा था। इसके बावजूद बुंदेलखंड, महाकौशल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार के दूरदराज क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला सुबह से तेज रहा। बांदा, महोबा, झांसी और हमीरपुर समेत आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में लोग बसों, ट्रेनों और निजी वाहनों से चित्रकूट पहुंचे।

रामघाट, राघव प्रयाग और आरोग्यधाम के आसपास मंदाकिनी का बहाव तेज होने के बावजूद श्रद्धालु निर्धारित स्थानों पर स्नान करते रहे। गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग और सुरक्षा रस्सियां लगाई गई थीं। लाउडस्पीकर से लगातार सावधानी बरतने की अपील की जाती रही। एसपी अरुण कुमार सिंह के निर्देश पर मेला क्षेत्र में ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई और घाटों, पार्किंग स्थलों तथा प्रमुख मार्गों पर नजर रखी गई।

स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने दान-पुण्य किया और रामघाट के मठ-मंदिरों में दर्शन-पूजन के बाद कामतानाथ मंदिर का रुख किया। मंदिर के बाहर सुबह से लंबी कतारें लग गईं। घंटों इंतजार के बाद भगवान कामतानाथ की एक झलक मिलते ही श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।

कामतानाथ के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने कामदगिरि की पंचकोसी परिक्रमा शुरू की। करीब पांच किलोमीटर लंबे मार्ग पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। कई स्थानों पर स्थिति ऐसी रही कि पैर रखने तक की जगह नहीं थी। बच्चे, महिलाएं, युवा और बुजुर्ग ‘जय श्रीराम’ तथा ‘कामतानाथ सरकार की जय’ का उद्घोष करते हुए परिक्रमा करते नजर आए।

कीचड़ और बदहाल रास्तों के बावजूद सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दंडवती परिक्रमा कर अपनी आस्था का परिचय दिया। कई बुजुर्ग और छोटे बच्चे भी परिवार के साथ परिक्रमा पूरी करते दिखे। कठिन परिस्थितियों में श्रद्धालुओं का यह समर्पण पूरे दिन चर्चा का विषय बना रहा।

बाढ़ के ठीक बाद आयोजित इस बड़ी अमावस्या ने जिला प्रशासन के सामने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था की चुनौती खड़ी कर दी थी। मंदाकिनी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए।

रामघाट और प्रमुख स्नान स्थलों पर पुलिस के साथ एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मोटरबोट व लाइफ जैकेट के साथ तैनात रहीं। घाटों पर बैरिकेडिंग की गई और गहरे पानी की ओर जाने पर रोक लगाई गई। भीड़ और क्षतिग्रस्त मार्गों को देखते हुए भारी वाहनों, बसों तथा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को मेला क्षेत्र में प्रवेश नहीं दिया गया। वाहनों को शहर के बाहर अस्थायी पार्किंग स्थलों पर खड़ा कराया गया, जहां से श्रद्धालु पैदल घाटों और मंदिरों तक पहुंचे।

स्थानीय लोगों ने खोले घर-द्वार, जगह-जगह भंडारे

बाढ़ से प्रभावित चित्रकूट में श्रद्धालुओं के भोजन और ठहरने की समस्या के बीच स्थानीय लोगों, संतों और स्वयंसेवी संस्थाओं ने मोर्चा संभाला। नदी किनारे की कई धर्मशालाओं और आश्रमों में पानी भरने के कारण ऊंचे क्षेत्रों में स्थित आश्रमों तथा स्थानीय नागरिकों ने श्रद्धालुओं के लिए अपने दरवाजे खोल दिए।

जगह-जगह भंडारे लगाए गए, जहां पूड़ी-सब्जी, खिचड़ी और पेयजल की व्यवस्था की गई। युवाओं की टोलियां परिक्रमा मार्ग के कीचड़ वाले हिस्सों में मिट्टी और बालू डालकर रास्ता सुगम बनाने में जुटी रहीं। आपदा के बीच सेवा और सहयोग की यह तस्वीर चित्रकूट की सामाजिक एकजुटता को भी सामने लाई।

आस्था ने दी आपदा को मात

भाद्रपद अमावस्या पर चित्रकूट में मंदाकिनी स्नान और कामदगिरि परिक्रमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि इस दिन कामदगिरि पर्वत पर भगवान श्रीराम की विशेष कृपा रहती है। मंदाकिनी स्नान को पितरों के तर्पण और मोक्ष से भी जोड़ा जाता है।

इस बार भदई अमावस्या का दृश्य धार्मिक आयोजन से आगे बढ़कर विपरीत परिस्थितियों में आस्था और सामूहिकता की मिसाल बन गया। एक ओर मंदाकिनी का रौद्र रूप था, दूसरी ओर उसके किनारे उमड़ा श्रद्धा का अथाह समुद्र। बाढ़ ने रास्ते रोके, पानी ने घाट डुबोए और कीचड़ ने कदम मुश्किल किए, फिर भी राम नाम का सहारा लिए श्रद्धालुओं की आस्था अडिग रही।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी

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