
हुगली, 11 सितंबर (हि. स.)। भारत में फ्रांस के राजदूत थियरी माथौ ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के ऐतिहासिक शहर चंदननगर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल के पर्यटन मंत्री शंकर घोष समेत अन्य मंत्रियों और विधायकों के साथ फ्रांसीसी शासनकाल की ऐतिहासिक विरासत से जुड़े रजिस्ट्री भवन का दौरा किया। इस भवन के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए 5.74 करोड़ रुपये की विरासत पुनरुद्धार परियोजना का आधिकारिक रूप से शुभारंभ किया गया।
परियोजना का उद्घाटन राजदूत थियरी माथौ और पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने सेंट जोसेफ कॉन्वेंट सभागार में संयुक्त रूप से किया। करीब 150 वर्ष पुराने इस भवन के संरक्षण की पहल भारत और फ्रांस के सहयोग से चंदननगर की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने की व्यापक योजना का हिस्सा है।
वर्ष 1875 में निर्मित यह दोमंजिला भवन फ्रांसीसी औपनिवेशिक स्थापत्य का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। कभी यहां रजिस्ट्री कार्यालय के साथ फ्रांसीसी अदालत भी संचालित होती थी। भवन की गहरी बरामदें, जोड़े में बने स्तंभ और लकड़ी के लूवर आज भी इसकी विशिष्ट फ्रांसीसी वास्तुकला की पहचान हैं।
लंबे समय तक उचित रखरखाव के अभाव में भवन की स्थिति जर्जर हो गई थी। इसके ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व को देखते हुए पश्चिम बंगाल हेरिटेज कमीशन ने 2017 में इसे हेरिटेज बिल्डिंग का दर्जा दिया था।
प्रस्तावित पुनरुद्धार परियोजना के तहत भवन को उसके मूल स्वरूप और स्थापत्य विशेषताओं के अनुरूप संरक्षित करने पर जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य फ्रांसीसी काल की वास्तुकला और चंदननगर की ऐतिहासिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है।
भारत और फ्रांस के सहयोग से पश्चिम बंगाल सरकार चंदननगर की अन्य ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए भी नई रूपरेखा तैयार कर रही है। सरकार को उम्मीद है कि पुनरुद्धार के बाद यह रजिस्ट्री भवन चंदननगर के फ्रांसीसी इतिहास, संस्कृति और स्थापत्य विरासत को समझने के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय