


नई दिल्ली, 12 सितंबर (हि.स.)। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का शनिवार को यहां के भारत मंडपम में आगाज हो गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आधिकारिक तौर पर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत की। भारत की एक अहम कूटनीतिक कामयाबी के तहत ब्रिक्स के सदस्य आज चली लंबी बातचीत के बाद एक साझा बयान जारी करने पर सहमत हुए।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस बातचीत के दौरान कई विवादित मुद्दों पर मतभेद सामने आए, लेकिन भारत ने सदस्यों के बीच अलग-अलग विचारों में तालमेल बिठाने और आम सहमति बनाने के लिए लगातार बातचीत की, जो तड़के चार बजे तक चली। ब्रिक्स देशों ने एक संयुक्त बयान जारी करने पर अपनी सहमति बना ली है।
भारत ने सदस्य देशों के बीच अलग-अलग विचारों को एक करने और सहमति बनाने के लिए लगातार बातचीत की। ये कामयाबी इसलिए भी खास है क्योंकि ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सभी एक ही मंच का हिस्सा हैं, जबकि कई क्षेत्रीय और भू-राजनीतिक मुद्दों पर उनके बीच गहरे मतभेद के साथ ही अलग-अलग विचार हैं।
पश्चिम एशिया में जारी संकट और बढ़ते तनाव के बीच, ईरान, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों के बीच सहमति बनाना एक बहुत मुश्किल कूटनीतिक चुनौती थी। हालांकि, भारत की कूटनीतिक कुशलता ने यह सुनिश्चित किया कि इन मतभेदों से ब्रिक्स की प्रक्रिया न रुके, लेकिन सदस्य देशों के बीच भू-राजनीतिक विचारों में भारी अंतर के बावजूद भारत ने एक संयुक्त बयान जारी करने पर सहमति बनाने का रास्ता साफ किया।
ब्रिक्स में 11 देश शामिल हैं, जिसमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात हैं। ये सदस्य देश सामूहिक रूप से विश्व की 49.5 फीसदी आबादी, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 40 फीसदी और विश्व व्यापार के 26 फीसदी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे दो दिवसीय (12-13 सितंबर) 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 11 पूर्ण सदस्य देशों और इसके 10 साझेदार देशों सहित कुल 21 देशों के नेता भाग ले रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर