चिन्मयकृष्ण दास के मुद्दे पर मुख्यमंत्री शुभेंदु का वामपंथियों पर निशाना, माकपा ने किया पलटवार

12 Sep 2026 15:45:53
शुभेंदु अधिकारी


कोलकाता, 12 सितंबर (हि.स.)। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को बांग्लादेश में बंदी साधु चिन्मयकृष्ण दास के मुद्दे पर वामपंथियों पर निशाना साधा। राजारहाट-गोपालपुर में गणेश पूजा के उद्घाटन के दौरान उन्होंने कहा कि अगर पश्चिम बंगाल का गठन नहीं हुआ होता तो यहां के बंगाली हिंदुओं की स्थिति भी चिन्मयकृष्ण दास जैसी हो सकती थी। उन्होंने बंगाली हिंदुओं के लिए श्यामा प्रसाद मुखर्जी और स्वामी प्रणवानंद के योगदान को याद किया।

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि चिन्मयकृष्ण दास की मां के अंतिम संस्कार के दौरान सामने आई उनकी भावुक तस्वीरों ने दुनियाभर के सनातनियों को झकझोर दिया। उन्होंने दावा किया कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी और स्वामी प्रणवानंद के संघर्ष के कारण ही बंगाली हिंदुओं को भारत में रहने का अवसर मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती वाम और तृणमूल कांग्रेस सरकारों ने दोनों नेताओं के योगदान और बंगाली हिंदुओं के लिए उनके संघर्ष की परंपरा को भुलाने का प्रयास किया।

चिन्मयकृष्ण दास नवंबर 2024 से बांग्लादेश की जेल में बंद हैं। पिछले गुरुवार को उनकी मां का निधन हुआ था। चटगांव की अदालत ने उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पांच घंटे की पैरोल दी थी। इसी दौरान सामने आई उनकी भावुक तस्वीरों का उल्लेख करते हुए शुभेंदु ने कहा कि उनकी मां की अंतिम इच्छा जेल में बंद बेटे से मिलने की थी, लेकिन आवेदन के बावजूद उन्हें जमानत नहीं मिली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पहले भी बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों और अत्याचार का मुद्दा उठाते रहे हैं। शुभेंदु ने पिछले वर्ष दिसंबर में मयमनसिंह में दीपु दास की हत्या का भी उल्लेख किया और कहा कि उन्होंने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तथा हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर आवाज उठाई थी।

माकपा ने लगाया दोहरे मापदंड का आरोप

शुभेंदु अधिकारी के आरोपों पर माकपा नेता कलतान दासगुप्ता ने पलटवार किया। उन्होंने भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वामपंथी देश की सीमाओं से ऊपर उठकर अल्पसंख्यकों के अधिकारों और बहुसंख्यक वर्चस्ववाद के खिलाफ खड़े रहे हैं।

कलतान ने कहा कि बांग्लादेश में चिन्मयकृष्ण दास को देशद्रोही बताकर जेल में रखा गया है, जबकि भारत में उमर खालिद भी जेल में हैं। उन्होंने भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार किए गए स्टेन स्वामी का भी उल्लेख किया और कहा कि उन्हें भी देशद्रोही का तमगा देकर जेल में रखा गया था, जहां उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने भाजपा पर इन मामलों में अलग-अलग रुख अपनाने का आरोप लगाया।

स्टेन स्वामी को 2020 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया था। दिल्ली हिंसा मामले में उमर खालिद 2020 से जेल में हैं।

वाम शासन और दुर्गा पूजा को लेकर भी निशाना

गणेश पूजा के उद्घाटन के दौरान शुभेंदु ने राज्य में 34 वर्षों के वाम शासन पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि वाम शासन के दौरान बंगाल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को महत्व नहीं दिया गया। उन्होंने पंचांग, शास्त्र, पुरोहित, आरती और पुष्पांजलि जैसी परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्हें भी नजरअंदाज किया गया।

मुख्यमंत्री ने पूजा पंडालों के बाहर वामपंथी संगठनों की ओर से लगाए जाने वाले पुस्तक स्टॉलों पर भी कटाक्ष किया। शुभेंदु ने आरोप लगाया कि इन स्टॉलों पर स्वामी विवेकानंद, लोकेश्वरानंद, भारत सेवाश्रम संघ या पश्चिम बंगाल के गठन के इतिहास से संबंधित पुस्तकें नहीं मिलती थीं, जबकि कार्ल मार्क्स की किताबें उपलब्ध रहती थीं। उन्होंने कहा कि गीता और हनुमान चालीसा जैसी पुस्तकें भी इन स्टॉलों पर नहीं होती थीं।

शुभेंदु ने तृणमूल कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वाम शासन के बाद उसके शासन के अंतिम वर्षों में बंगाल को 'जमातीकरण' की दिशा में ले जाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष दुर्गा पूजा पंचांग के अनुसार होगी और विसर्जन भी निर्धारित परंपरा के अनुसार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पितृपक्ष में पूजा का उद्घाटन नहीं किया जाएगा तथा अष्टमी के दिन सभी शराब की दुकानें बंद रहेंगी।

सुजन चक्रवर्ती ने भी किया पलटवार

माकपा नेता सुजन चक्रवर्ती ने शुभेंदु की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह मुख्यमंत्री होने के नाते यह तय नहीं कर सकते कि लोग कौन-सी किताब पढ़ेंगे या क्या खाएंगे। उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर के 'शारदोत्सव' और वीरेंद्रकृष्ण भद्र के 'आश्विनेर शारदप्रात' जैसे सांस्कृतिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस वर्ष भी दुर्गा पूजा उसी तरह होगी, जिस तरह अब तक होती आई है।

दरअसल, पिछले गुरुवार को विधानसभा में शुभेंदु अधिकारी ने दुर्गा पूजा पंडालों के पास वामपंथी संगठनों के पुस्तक स्टॉल लगाने को लेकर कहा था कि स्टॉल पर 'दुर्गा पूजा' शब्द का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने केवल 'शारदोत्सव' लिखे जाने पर आपत्ति जताई थी। इस मुद्दे पर भी वामपंथी दलों ने विरोध जताया है।--------------

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

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