हृदय रोगियों के लिए नई गाइडलाइन जारी, इलाज के बाद जल्द सामान्य जीवन में लौटने में मिलेगी मदद

12 Sep 2026 16:10:53
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नई दिल्ली, 12 सितंबर (हि.स.)। हृदय रोगियों को इलाज के बाद बेहतर तरीके से स्वस्थ करने के लिए वर्धमान मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल ने नई गाइडलाइन जारी की है। इसका मकसद हृदय रोगियों को बीमारी के बाद दोबारा सामान्य जीवन जीने में मदद करना है। इसमें मरीज के व्यायाम, खान-पान, मानसिक स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जीवनशैली पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।

गाइडलाइन जारी करने के लिए शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में जाने-माने वैज्ञानिक और जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. निर्मल कुमार गांगुली मुख्य अतिथि रहे। डॉ. हर्षवर्धन और डॉ. विजय मोहन कोहली विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में विश्व स्वास्थ्य संगठन- एसईएआरओ की क्षेत्रीय सलाहकार डॉ. ताशी टोबगे समेत कई वरिष्ठ डॉक्टर और विशेषज्ञ भी मौजूद रहे।

डॉ. निर्मल कुमार गांगुली ने देश में बढ़ती हृदय संबंधी बीमारियों को देखते हुए ऐसी सेवाओं को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की जरूरत बताई। उन्होंने भारतीय परिस्थितियों के अनुसार तैयार की गई इस गाइडलाइन की सराहना की।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, नई गाइडलाइन से हृदय रोगियों की देखभाल में एकरूपता आएगी।

उन्होंने कहा कि इससे मरीजों को बीमारी के बाद अपनी शारीरिक क्षमता वापस पाने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और जीवन की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद मिलने की उम्मीद है। दिल की बीमारी से ठीक होने के बाद केवल दवा लेना ही पर्याप्त नहीं है। मरीज को सही व्यायाम, बेहतर खान-पान, तनाव कम करने और जीवनशैली में बदलाव की भी जरूरत होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए कार्डियक रिहैबिलिटेशन यानी हृदय रोग के बाद शरीर को दोबारा मजबूत बनाने की प्रक्रिया के लिए यह गाइडलाइन तैयार की गई है।

गाइडलाइन तैयार करने वाली टीम की प्रमुख सदस्य डॉ. सुमन बादल ने बताया कि इसे भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को ध्यान में रखकर बनाया गया है। देश में अस्पतालों की सुविधाओं, डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता तथा मरीजों की जागरूकता में अंतर को भी इसमें ध्यान में रखा गया है।

इस गाइडलाइन में कार्डियोलॉजिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, डाइटिशियन, मनोवैज्ञानिक, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को मिलकर मरीज की देखभाल करने पर जोर दिया गया है। मरीज की स्थिति के अनुसार व्यायाम कराने, खान-पान सुधारने, मानसिक सहयोग देने और भविष्य में बीमारी से बचाव के उपायों पर भी ध्यान दिया जाएगा।

इस मौके पर दिशा-निर्देश विकास समिति के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि भारत में हृदय रोगियों के पुनर्वास के लिए एक आसान, व्यवस्थित और व्यापक व्यवस्था की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एक जैसे चिकित्सकीय दिशा-निर्देश होने से मरीजों को बेहतर और समान स्तर की पुनर्वास सेवाएं मिल सकेंगी। साथ ही, हृदय रोगों के इलाज में पुनर्वास को और अधिक प्रभावी तरीके से शामिल किया जा सकेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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