उत्तर प्रदेश और असम में संस्कृति से लेकर खान पान तक कई समानताएं : राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य

13 Sep 2026 21:50:53
असम के राज्यपाल लक्षमण आचार्य के साथ यूपी के पत्रकार


गुवाहाटी, 13 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर के असम राज्य में कई समानताएं हैं। सांस्कृतिक रूप से समृद्ध इस राज्य के लोगों की थाली में दाल, भात तरकारी वैसे ही दिखता और बोला जाता है जैसे उत्तर प्रदेश के लोग बोलते हैं।

असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य रविवार की शाम उत्तर प्रदेश से गुवाहाटी पहुंचे पत्रकारों के दल से मुलाकात के दौरान उन्होंने यह बातें कहीं। केंद्र सरकार की पहल पर पीआईबी की ओर से पत्रकारों का यह दल पूर्वोत्तर राज्यों की यात्रा पर यहां पहुंचा है। इस अवसर पर आचार्य ने कहा कि उनके गृह राज्य से पत्रकारों का असम आना उन्हें बहुत अच्छा लगा। पत्रकारों से उन्होंने खुलकर अपने गृह राज्य उत्तर प्रदेश के बारे में चर्चा की। बनारस में पप्पू की अड़ी से लेकर लखनऊ के शर्मा जी की चाय, समोसा और बन मख्खन का स्वाद भी याद किया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश का दाल, भात तरकारी अब दाल, चावल सब्जी हो गया है लेकिन असम में अब भी दाल, भात तरकारी कहा जाता है। यूपी में हमारे बचपन में गोवंशों को कहा जाता था कि गोरु चराने जा रहे हैं। असम में गोरु बिहू पर्व का भव्य आयोजन किया जाता है। इस पर्व की यहां बड़ी महत्ता है। इस प्रकार से उत्तर प्रदेश और असम बेहद करीब नज़र आते हैं।

एक राज्यपाल के रूप में उन्होंने असम में कई ठोस कदम उठाए। इसके लिए उन्हें खुशी भी है। उन्होंने बताया कि असम के लोग बहुत सज्जन, प्रेमी, राष्ट्रभक्त और अनुशासित हैं। यहां के लोग अपनी माटी से बहुत प्रेम करते हैं। राज्यपाल के रूप में उन्होंने असम में अमार माटी अमार नायक पहल शुरू की। इसके तहत विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों की स्थानीय स्तर भी पहचान बनी रहे, उन्हें लोग आगे भविष्य में भी याद रखें, इसका प्रयास हुआ।

वहीं गवर्नर वरिष्ठ शिक्षक सम्मान की शुरुआत की। असम के राज्यपाल की कुर्सी सम्भालते ही उन्होंने लोकभवन के अधिकारियों से शिक्षक दिवस के अवसर पर होने वाले कार्यक्रम के बारे में पूछा तो पता चला कि 25 से 30 शिक्षकों का सम्मान गुवाहाटी में किया जाता है। इस पर उन्होंने तय किया कि अब शिक्षक लोकभवन नहीं आएंगे बल्कि राज्यपाल उनके द्वार पहुंचकर वरिष्ठ शिक्षकों का सम्मान करेंगे। इसके बाद प्रदेश के एक 95 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक नवीन चंद्र को उनके घर जाकर सम्मानित किया। वह क्षण मेरे लिए सुखद रहा। अब यह श्रृंखला चल पड़ी है। अब शिक्षकों को इसी प्रकार पुरस्कृत किया जाता है।

पत्रकारों के साथ चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि असम में मां कामाख्या का अद्वितीय मंदिर है। यहां दर्शन के लिए देश और दुनिया से लोग आते हैं। इसके साथ ही महादेव का मंदिर है। गुवाहाटी के पास डाकिन पर्वत पर स्थित मंदिर को भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग कहा जाता है। वैसे तो महाराष्ट्र में भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग होने की बात मानी गयी है। लेकिन असम के लोग मानते हैं कि गुवाहाटी में ही भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग विद्यमान है। दरअसल भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के बारे में शास्त्रों में उल्लेख है कि यह ज्योतिर्लिंग डाकिन पर्वत पर स्थित है और डाकिन पर्वत असम में है। लिहाजा यहां जो ज्योतिर्लिंग है, वही भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग है।

एयरपोर्ट की सुंदरता का भी उन्होंने उल्लेख किया। पर्यटकों के एयरपोर्ट पर पहुंचते ही उन्हें असम की संस्कृति का दर्शन हो जाता है। गुवाहाटी में बने एयरपोर्ट में बांस का भरपूर इस्तेमाल किया गया है। यहां के खानपान से लेकर पहनावे तक की चीजें वहां विद्यमान हैं। असम सांस्कृतिक रूप से और पर्यटन की दृष्टि से बहुत ही समृद्धशाली राज्य है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिलीप शुक्ला

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