

श्रीगंगानगर, 13 सितंबर (हि.स.)। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर श्रीगंगानगर सेक्टर के रावला क्षेत्र में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में करीब 5 किलो 600 ग्राम हेरोइन और 500 ग्राम अफीम बरामद की है। बरामद नशीले पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 30 करोड़ रुपये आंकी गई है। प्रारंभिक जांच में यह खेप पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के जरिए भारतीय क्षेत्र में पहुंचाए जाने की आशंका जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार बीएसएफ की जी ब्रांच को 14 केएनडी क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधि और नशीले पदार्थों की खेप पहुंचाए जाने संबंधी खुफिया सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर बीएसएफ की 140वीं बटालियन और स्थानीय पुलिस ने क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। तलाशी के दौरान एक किसान के खेत से संदिग्ध पैकेट बरामद किए गए। इनमें करीब 5 किलो 600 ग्राम हेरोइन और 500 ग्राम अफीम होने की जानकारी सामने आई।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार खेत से मिले पैकेट रस्सी से बंधे हुए थे। इस तरह की पैकिंग को देखते हुए जांच एजेंसियां इनके ड्रोन के माध्यम से सीमा पार से भारतीय क्षेत्र में गिराए जाने के पहलू की जांच कर रही हैं। हालांकि अभी तक यह आधिकारिक रूप से पुष्ट नहीं हुआ है कि बरामद खेप वास्तव में ड्रोन के जरिए पाकिस्तान से लाई गई थी। इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि खेप को भारतीय क्षेत्र में कहां गिराया गया और इसे लेने के लिए कौन आने वाला था। इसके साथ ही संभावित ड्रोन रूट, खेप गिराए जाने के समय और स्थान तथा भारतीय क्षेत्र में सक्रिय संभावित हैंडलर्स के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
इस कार्रवाई में बीएसएफ की जी ब्रांच से मिले इनपुट को अहम माना जा रहा है। सूचना मिलने के बाद संबंधित क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई गई और संभावित स्थानों पर तलाशी ली गई। सर्च ऑपरेशन के दौरान खेत से संदिग्ध पैकेट मिलने के बाद पूरे क्षेत्र को खंगाला गया।
स्थानीय पुलिस भी कार्रवाई में शामिल रही। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पुलिस को मिले इनपुट के आधार पर थानाधिकारी बलवंत कुमार के नेतृत्व में टीम ने बीएसएफ के साथ मिलकर संदिग्ध क्षेत्र की तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान नशीले पदार्थों को कब्जे में लिया गया। करीब 30 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत की नशीले पदार्थों की बरामदगी के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी खेप कहां पहुंचाई जानी थी और इसके पीछे कौन लोग सक्रिय थे। जांच में सीमा पार से खेप भेजने वाले लोगों के साथ भारतीय क्षेत्र में संभावित रिसीवर और स्थानीय नेटवर्क की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
सीआईडी और अन्य संबंधित एजेंसियां भी मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच कर सकती हैं। जांच एजेंसियों का मुख्य फोकस बरामद नशीले पदार्थों के स्रोत, संभावित रिसीवर और इससे जुड़े नेटवर्क की पहचान पर है। खेप बरामद होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने आसपास के क्षेत्र में भी तलाशी और निगरानी बढ़ा दी है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कहीं इसी कथित तस्करी से जुड़ी कोई अन्य खेप, पैकेट या संदिग्ध सामग्री आसपास तो नहीं छिपाई गई है। साथ ही संभावित हैंडलर्स की गतिविधियों से जुड़े सुराग भी तलाशे जा रहे हैं। जांच एजेंसियां बरामद पैकेटों की पैकिंग, स्थान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बना रही हैं। ड्रोन से खेप पहुंचाने के मामले की पुष्टि होने पर सीमा पार सक्रिय तस्करी नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।
फिलहाल बीएसएफ और पुलिस की ओर से मामले की जांच जारी है। बरामद नशीले पदार्थों को नियमानुसार कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई की जा रही है। ड्रोन के जरिए कथित डिलीवरी, पाकिस्तान से संभावित कनेक्शन और भारतीय क्षेत्र में खेप हासिल करने वाले नेटवर्क की भूमिका जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव