
आसनसोल, 14 सितंबर (हि. स.)। थाईलैंड के पटाया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योगासन प्रतियोगिता में भारत और पश्चिम बंगाल के प्रतिभागियों ने शानदार प्रदर्शन किया। इस प्रतियोगिता में पश्चिम बर्दवान जिले के आसनसोल की गृहिणी पंपा पाल ने 42 से 50 वर्ष आयु वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर देश और राज्य का नाम रोशन किया।
प्रतियोगिता से लौटने के बाद सोमवार को आसनसोल में पत्रकारों से रूबरू होते हुए पंपा पाल ने अपनी उपलब्धि और संघर्ष की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि पटाया में आयोजित इस ओपन इंटरनेशनल योगासन प्रतियोगिता में नौ देशों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। पश्चिम बंगाल से कुल 49 प्रतिभागी प्रतियोगिता में शामिल हुए, जिनमें 19 ने स्वर्ण, 17 ने रजत और नौ प्रतिभागियों ने कांस्य पदक हासिल किया।
पंपा पाल ने बताया कि उनके आयु वर्ग में प्रतियोगिता के दौरान तीन अनिवार्य और दो वैकल्पिक आसन करने थे। वैकल्पिक आसनों में हैंड बैलेंस और लेग बैलेंस शामिल थे। अनिवार्य आसनों की जानकारी आयोजकों की ओर से पहले ही दे दी जाती है और उसी के आधार पर प्रतिभागियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाता है।
उन्होंने कहा कि गृहिणी होने के साथ योग को आगे बढ़ाना उनके लिए आसान नहीं है। सुबह करीब चार बजे उठकर घर के कामकाज से दिन की शुरुआत होती है। सुबह चार से छह बजे तक घरेलू काम करने के बाद साढ़े छह से साढ़े नौ बजे तक योग की कक्षाएं चलाती हैं। इसके बाद घर के काम, टिफिन और रसोई की जिम्मेदारी निभाने के बाद दोपहर तीन बजे से फिर योग की कक्षा शुरू हो जाती है। योग की ट्यूशन के माध्यम से वह परिवार के खर्च में भी सहयोग करती हैं। उनके पति निजी क्षेत्र में नौकरी करते हैं और बेटा पढ़ाई के साथ ऑनलाइन ट्यूशन कर आय में सहयोग करता है।
पंपा पाल ने कहा कि वह और उनके जैसी कई प्रतिभाएं जिला और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद राष्ट्रीय स्तर तक नहीं पहुंच पा रही हैं। उन्होंने राज्य सरकार से इस दिशा में उचित मूल्यांकन और सहयोग की अपील की।
उन्होंने कहा कि कई बार आसन पूरी तरह सही नहीं होने या पैर की स्थिति ठीक नहीं होने जैसी वजहों से प्रतिभागियों को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल पाता। ऐसे में वे ओपन इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा साबित कर रहे हैं।
पंपा पाल ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री का संदेश है 'खेलो इंडिया, खेलो', लेकिन जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों और योग प्रतिभाओं को पर्याप्त सहयोग नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पार करने के बाद कई प्रतिभाएं राज्य स्तर पर ही रुक जाती हैं। सरकार को ऐसी प्रतिभाओं का उचित मूल्यांकन कर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व का अवसर देना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी आवाज सरकार तक पहुंचेगी और भविष्य में योग खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए बेहतर अवसर और सहयोग मिलेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा