एशियाई खेल 2026: हॉकी में भारत की नजर स्वर्ण पर, लॉस एंजिल्स ओलंपिक का टिकट भी दांव पर

युगवार्ता    15-Sep-2026
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भारतीय हॉकी टीम


नई दिल्ली, 15 सितंबर (हि.स.)। हाल ही में संपन्न विश्व कप में भारतीय पुरुष टीम के आठवें और महिला टीम के पांचवें स्थान पर रहने के बाद अब दोनों टीमें एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के लक्ष्य के साथ उतरेंगी। पुरुष वर्ग में भारत को खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा है, जबकि महिला टीम भी चीन को पछाड़कर स्वर्ण पदक जीतने की उम्मीद के साथ मैदान में उतरेगी। एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफिकेशन का रास्ता भी खोलेगा।

क्रेग फुल्टन की अगुवाई वाली भारतीय पुरुष टीम पिछले चार वर्षों से एशियाई हॉकी में अपना दबदबा बनाए हुए है। वर्ष 2023 से भारत ने दो एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी, एशिया कप और एशियाई खेलों सहित सभी महाद्वीपीय प्रतियोगिताएं जीती हैं और इस दौरान उसे एक भी हार का सामना नहीं करना पड़ा।

हालांकि, लगातार दूसरी बार एशियाई खेलों का स्वर्ण जीतना आसान नहीं होगा। वर्ष 2006 के बाद से कोई भी टीम लगातार दो संस्करणों में पुरुष हॉकी का स्वर्ण नहीं जीत सकी है। काकामिगाहारा में भारतीय टीम का अभियान एक सप्ताह से भी कम समय में शुरू होगा और विश्व कप में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद यह प्रतियोगिता फुल्टन और टीम के कई वरिष्ठ खिलाड़ियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी।

विश्व कप की गलतियों से सीखने की चुनौती

विश्व कप में अमित रोहिदास, जरमनप्रीत सिंह, सुमित, जुगराज सिंह, यशदीप सिवाच, संजय राणा और हरमनप्रीत सिंह सहित भारतीय रक्षापंक्ति के खिलाड़ियों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। भारत ने पूरे टूर्नामेंट में 19 गोल खाए, जो विश्व कप में पांचवां सबसे खराब रक्षात्मक रिकॉर्ड था। पाकिस्तान के खिलाफ भी भारत ने तीन गोल गंवाए।

गोलकीपिंग से लेकर फॉरवर्ड लाइन तक लगभग हर विभाग संघर्ष करता नजर आया। हालांकि, पेनल्टी कॉर्नर पर हरमनप्रीत सिंह की ड्रैगफ्लिक भारत के लिए बड़ी सकारात्मक बात रही। पीठ की समस्या से जूझने के बावजूद उनकी शानदार फिनिशिंग ने कई मौकों पर भारत को मुकाबले में बनाए रखा।

अब हरमनप्रीत की सफलता को फील्ड प्ले में भारतीय फॉरवर्ड खिलाड़ियों को आगे बढ़ाना होगा। 2023 के एशियाई खेलों के बाद से अभिषेक नैन लगातार प्रभावी रहे हैं और उन्होंने 86 मैचों में 30 गोल किए हैं। वहीं, अनुभवी फॉरवर्ड मनप्रीत सिंह ने 69 मैचों में 11 गोल किए हैं।

फुल्टन ने टीम के चारों क्वार्टर में समान स्तर बनाए रखने में नाकाम रहने पर निराशा जताई थी। हालांकि, एशिया की अन्य टीमों में भी पूरे मैच में लगातार उच्च स्तर का प्रदर्शन करने की क्षमता को लेकर सवाल हैं। लॉस एंजिल्स ओलंपिक का टिकट दांव पर होने के कारण फुल्टन ने टीम में अनुभव को प्राथमिकता दी है। इसी वजह से आदित्य लालगे की जगह राजकुमार पाल को टीम में शामिल किया गया है, जो विश्व कप में भी टीम के साथ थे।

भारत को ग्रुप चरण में मेजबान जापान और दक्षिण कोरिया के खिलाफ शुरुआती मुकाबलों में अपनी तैयारियों की परीक्षा देनी होगी। इसके बाद नॉकआउट चरण में पाकिस्तान या मलेशिया से संभावित मुकाबला हो सकता है।

महिला टीम भी स्वर्ण की दावेदार

महिला वर्ग में सजॉर्ड मारिजने की भारतीय टीम चीन से एशियाई वर्चस्व छीनने के इरादे से उतरेगी। विश्व कप में उम्मीद से बेहतर पांचवें स्थान पर रहने के बाद टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है। युवा खिलाड़ियों और अनुभवी खिलाड़ियों के संतुलित मिश्रण ने टीम में नई ऊर्जा पैदा की है।

विश्व कप में भारत ने इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गोल नहीं खाया, जबकि चीन, दक्षिण अफ्रीका, नीदरलैंड्स और जर्मनी के खिलाफ चार मुकाबलों में केवल छह गोल गंवाए। भारत ने जिन छह टीमों का सामना किया, उनमें से पांच की रैंकिंग उससे बेहतर थी।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुकाबले में गेंद पर बेहतर नियंत्रण और संयम रहता तो भारत सेमीफाइनल की दौड़ में हो सकता था। हालांकि, विश्व कप में 11 खिलाड़ियों के पदार्पण के साथ उतरी युवा टीम अब उन अनुभवों को एशियाई खेलों में इस्तेमाल करना चाहेगी।

नवनीत कौर और दीपिका भारत के लिए गोल करने की सबसे बड़ी उम्मीद होंगी। दोनों फील्ड गोल के साथ-साथ पेनल्टी कॉर्नर पर भी अहम भूमिका निभा सकती हैं। ग्रुप चरण में अपेक्षाकृत कमजोर टीमों के खिलाफ मुकाबले से भारत के अन्य आक्रमणकारी खिलाड़ियों को भी अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिलेगा।

भारत के पास सविता पूनिया और बिचु देवी के रूप में दो मजबूत गोलकीपर हैं। पदक दौर में, खासकर चीन के खिलाफ संभावित मुकाबले में, दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। विश्व कप के शुरुआती मुकाबले में भारत ने चीन को 2-2 से बराबरी पर रोका था, लेकिन रक्षापंक्ति की अनुभवहीनता के कारण शिल्पी दास की गलती से चीन को पेनल्टी स्ट्रोक मिल गया था।

44 साल का सूखा खत्म करने का लक्ष्य

अनुभवी मिडफील्डर नेहा को भरोसा है कि भारत इस बार 44 साल से चले आ रहे एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक के सूखे को खत्म कर सकता है। उन्होंने कहा, “हमें स्वर्ण पदक जीतना है। चाहे कुछ भी हो, हम अपना सर्वश्रेष्ठ देंगे। हम स्वर्ण पदक जीतेंगे।”

महिला टीम के साथ एक और पुनरुत्थान की कोशिश कर रहे मारिज्ने का मानना है कि भारतीय प्रतिभाओं का मौजूदा समूह उनके पहले कार्यकाल वाली टीम से भी बेहतर हो सकता है। हालांकि, 2026 की यह टीम विश्व कप में पांचवें स्थान की शानदार उपलब्धि के बाद एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतकर ही इस दावे को सही साबित कर सकेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे

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