
मुंबई, 16 सितंबर (हि.स)। मराठा आरक्षण के मुद्दे पर 29 अगस्त से भूख हड़ताल कर रहे मनोज जरांगे पाटिल की बुधवार को बीड़ जिले के पाटोदा में तबीयत बिगड़ गई। डॉक्टरों की टीम पाटोदा में ही जरांगे का इलाज कर रही है। डॉक्टरों ने मनोज जरांगे को अस्पताल में भर्ती होकर आराम करने का सुझाव दिया है, लेकिन जरांगे अस्पताल न जाने पर अड़े हुए हैं।
मनोज जरांगे पाटिल मंगलवार को अंतरवाली सराटी से मुंबई के लिए रवाना हुए थे। गेवराई और बीड में समर्थकों की ओर से स्वागत के बाद वह रात करीब 2 बजे पाटोदा पहुंचे, जहां एक सार्वजनिक सभा आयोजित की गई। सभा के दौरान उन्होंने मंच से अपनी तबीयत खराब होने की बात कही थी। उन्होंने कहा था, ऐसा लग रहा है जैसे मेरे पेट में तकलीफ हो गई है। पेट की तकलीफ ठीक होने पर ही मैं आगे बढ़ पाऊंगा, वरना मैं नहीं जा पाऊंगा। बॉम्बे मार्च से ज्यादा जरूरी आरक्षण है।
सभा के बाद जरांगे पाटिल को पाटोदा में ही रात में रुकना था। सुबह उनकी तबीयत और बिगड़ने के बाद डॉक्टरों ने उनकी जांच की और तत्काल इलाज की जरूरत बताई। इसके बाद नारायणगढ़ के महंत शिवाजी महाराज और श्री बंकट स्वामी संस्थान के महंत लक्ष्मण महाराज मेंगड़े पाटोदा पहुंचे। दोनों ने जरांगे पाटिल से इलाज कराने का आग्रह किया। इसके बाद उन्होंने इलाज के लिए सहमति दी और पाटोदा में ही उनका उपचार शुरू किया गया। सुबह से उन्हें चार सलाइन चढ़ाई जा चुकी है, इलाज जारी है।
जरांगे पाटिल के साथ मुंबई की ओर बढ़ रहे हजारों मराठा समुदाय के लोग भी फिलहाल पाटोदा में रुक गए हैं। तय कार्यक्रम के मुताबिक बुधवार को जरांगे पाटिल को पाटोदा से श्रीगोंदा की ओर रवाना होना था और श्रीगोंदा में रुकने का कार्यक्रम था। हालांकि, तबीयत खराब होने के कारण उनका यह कार्यक्रम प्रभावित हुआ है। जरांगे पाटिल के इलाज को देखते हुए पाटोदा में पुलिस सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव