
नई दिल्ली, 16 सितंबर (हि.स.)। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के मेगा आईपीओ की लॉन्चिंग के लिए अब कुछ घंटे ही बाकी हैं। बड़ी संख्या में निवेशक लंबे समय से इस आईपीओ का इंतजार कर रहे थे और अब उनका इंतजार पूरा होने वाला है। इस आईपीओ की लॉन्चिंग के पहले ग्रे मार्केट से जो खबर आ रही है, वो एनएसई के पब्लिक इश्यू में आवेदन करने वाले निवेशकों को हतोत्साहित करने वाली हैं। एनएसई के शेयरों का ग्रे मार्केट प्रीमियम लगातार घटता जा रहा है।
ग्रे मार्केट से मिल रही जानकारी के मुताबिक ग्रे मार्केट में चार सितंबर एनएसई के शेयर का प्रीमियम 285 रुपये था, जो इसके इश्यू प्राइस का 15.97 प्रतिशत था। इसके अगले दिन एनएसई के शेयर का ग्रे मार्केट प्रीमियम (जीएमपी) बढ़ कर 310 रुपये हो गया। मतबल पांच सितंबर को एनएसई के शेयर का जीएमपी 17.37 प्रतिशत हो गया। यहां तक तो सब कुछ ठीक था, लेकिन इसके बाद इस शेयर का जीएमपी लगातार गिरता चला गया।
अगले चार दिन में यानी 9 सितंबर तक एनएसई के शेयर का ग्रे मार्केट प्रीमियम गिर कर 222 रुपये के स्तर तक पहुंच गया। इतनी गिरावट के बाद भी जीएमपी 12.44 प्रतिशत के स्तर पर था। इसके बाद 10 सितंबर को जब एनएसई के आईपीओ के लिए प्राइस बैंड का ऐलान हुआ, उस दिन ग्रे मार्केट में इस शेयर का प्रीमियम घट कर 192 रुपये यानी 10.76 प्रतिशत के स्तर पर आ गया।
एनएसई के शेयर की जीएमपी का गिरना आगे भी जारी रहा। मंगलवार यानी 15 सितंबर को इस शेयर का ग्रे मार्केट प्रीमियम गिर कर 160 रुपये यानी 8.96 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि आज शाम छह बजे के बाद इस शेयर का ग्रे मार्केट प्रीमियम थोड़ा सुधर कर 162 रुपये यानी 9.08 प्रतिशत के स्तर पर पहुंचा है। मतलब अभी भी इस शेयर का जीएमपी 10 प्रतिशत के स्तर से नीचे है।
मार्केट एक्सपर्ट आमतौर पर 10 प्रतिशत से नीचे ग्रे मार्केट प्रीमियम के रहने पर उस शेयर को जोखिम पूर्ण मानते हुए उससे दूर रहने की सलाह देते हैं। इस लिहाज से एनएसई का शेयर भी आईपीओ की लॉन्चिंग के पहले जोखिम वाली स्थिति में है। मतलब इस शेयर में निवेश करने पर आईपीओ निवेशकों को लिस्टिंग गेन की जगह लिस्टिंग लॉस का भी सामना करना पड़ सकता है।
कल इस आईपीओ को सब्सक्रिप्शन के लिए लॉन्च किया जाना है। इस आईपीओ में 21 सितंबर तक बोली लगाई जा सकती है। इश्यू की क्लोजिंग के बाद 22 सितंबर को शेयरों का अलॉटमेंट किया जाएगा, जबकि 23 सितंबर को अलॉटेड शेयर डीमैट अकाउंट में क्रेडिट कर दिए जाएंगे। कंपनी के शेयर 24 सितंबर को बीएसई पर लिस्ट हो सकते हैं।
इस आईपीओ में बोली लगाने के लिए 1,700 रुपये से लेकर 1,785 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है, जबकि लॉट साइज 8 शेयर का है। इस आईपीओ में रिटेल इनवेस्टर्स कम से कम एक लॉट यानी 8 शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं, जिसके लिए उन्हें 14,280 रुपये का निवेश करना होगा। इसी तरह रिटेल इनवेस्टर 1,99,920 रुपये के निवेश से अधिकतम 14 लॉट में 112 शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं। इस आईपीओ के तहत एक रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 12,64,36,650 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के जरिये बेजे जा रहे हैं।
इस आईपीओ में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए 50 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व किया गया है। इसके अलावा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 35 प्रतिशत हिस्सा और नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (एनआईआई) के लिए 15 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व है। इस इश्यू के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी लिमिटेड को बुक रनिंग लीड मैनेजर बनाया गया है, जबकि एमयूजीएफ इनटाइम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को रजिस्ट्रार बनाया गया है।
एनएसई की वित्तीय स्थिति की बात करें तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत मामूली उतार चढ़ाव के बावजूद लगातार मजबूत बनी रही है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी को 8,305.74 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 12,187.69 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का शुद्ध लाभ थोड़ा कम होकर 10,302.06 करोड़ रुपये हो गया। मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की बात करें तो पहली तिमाही के अंत यानी 30 जून 2026 तक एनएसई को 3,120.08 रुपये का शुद्ध लाभ हो चुका था।
इस दौरान एनएसई की राजस्व प्राप्ति में भी मामूली उतार चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2023-24 में इसे 16,352.06 करोड़ रुपये का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 19,176.83 करोड़ रुपये और 2025-26 में थोड़ा फिसल कर 18,713.37 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की बात करें तो पहली तिमाही के अंत यानी 30 जून 2026 तक एनएसई को 5,252.17 करोड़ रुपये का राजस्व मिल चुका था।
एनएसई के रिजर्व और सरप्लस में इस अवधि को दौरान लगातार बढ़ोतरी होती रही। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 23,924.91 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो वित्त वर्ष वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 30,105.83 करोड़ रुपये के स्तर पर और 2025-26 में बढ़ कर 31,866.04 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की बात करें तो पहली तिमाही के अंत यानी 30 जून 2026 तक एनएसई का रिजर्व और सरप्लस 34,996.73 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंचा हुआ था।
इस अवधि में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के नेटवर्थ में भी लगातार बढ़ोतरी होती रही। वित्त वर्ष 2023-24 में एनएसई का नेटवर्थ 23,833.10 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 30,165.05 करोड़ रुपये के स्तर पर और पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में उछल कर 31,869.72 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के अंत यानी 30 जून 2026 तक एनएसई का नेटवर्थ 94,983.74 करोड़ रुपये हो गया था।
इसी तरह एनएसई का ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2023-24 में 11,623.83 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 16,021.36 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में एनएसई का ईबीआईटीडीए घट कर 14,519.09 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की बात करें तो पहली तिमाही के अंत यानी 30 जून 2026 ये 4,332.04 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक