बड़े राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए कर नीति पर चर्चा होनी चाहिएः सीतारमण

16 Sep 2026 16:45:53
8वें इंटरनेशनल टैक्स कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री सीतारमण


8वें इंटरनेशनल टैक्स कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री सीतारमण


-आईटीआरएएफ से कर अनुसंधान को नीति-निर्माण से जोड़ने का किया आह्वान

नई दिल्ली/बेंगलुरु, 16 सितंबर (हि.स.)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि कर नीति (टैक्स पॉलिसी) पर चर्चा छोटे सेक्टर की बातों से ऊपर उठकर बड़े राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देनी चाहिए।

उन्होंने बेंगलुरु में आयोजित ‘इंटरनेशनल टैक्स रिसर्च एंड एनालिसिस फाउंडेशन’ (आईटीआरएएफ) द्वारा ‘न्यू एज टैक्सेशन’ विषयक 8वें अंतरराष्ट्रीय कर सम्मेलन को संबोधित करते हुए इस बात पर जोर दिया कि प्रस्तावों में अलग-अलग रेट कट यानी छूट के बजाय लंबे समय के विकास के लक्ष्यों पर ध्यान देना चाहिए। मंत्री ने शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और थिंक टैंक से कहा कि वे स्वतंत्र टैक्स पॉलिसी रिसर्च को सार्वजनिक चर्चा का नियमित हिस्सा बनाएं ताकि इसकी जांच की जा सके, इस पर सवाल उठाए जा सकें और इसमें सुधार किया जा सके।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कर नीति पर स्वतंत्र शोध को सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनना चाहिए। वित्त मंत्री ने कहा कि कर पेशेवरों को क्षेत्रीय हितों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देनी चाहिए। सीतारमण ने कहा भारत में कराधान के क्षेत्र में उच्च स्तर के पेशेवर और विशेषज्ञ हैं लेकिन उनकी विशेषज्ञता को एक साथ लाकर नीतिगत विकल्पों में योगदान देने के लिए मजबूत संस्थागत मंच की जरूरत है।

सीतारमण ने आईटीआरएएफ से स्वतंत्र कर नीति अनुसंधान को अधिक प्रमुखता से सामने लाने और उसे नीति-निर्माण तथा सार्वजनिक विमर्श से सीधे जोड़ने का आग्रह किया। उन्होंने जोर देकर कहा है कि सरकार को दिए जाने वाले टैक्स से जुड़े प्रस्तावों में दरों में कटौती, छूट या रियायतें मांगने के बजाय देशहित को सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए।

वित्त मंत्री ने अपने मंत्रालय की बजट-पूर्व चर्चाओं के बारे में बात करते हुए कहा कि इन चर्चाओं से ऐसे बड़े सवाल उठने चाहिए कि 'विकसित भारत 2047' की ओर बढ़ते हुए अगले दो दशकों में भारत में किस तरह की टैक्स व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने बेहतर टैक्स रिसर्च पर जोर दिया, जो सभी पहलुओं पर विचार करे। साथ ही इसके असर को मापे, ट्रेड-ऑफ (फायदे-नुकसान के बीच संतुलन) को समझे, सरकारी खजाने को होने वाले हर राजस्व नुकसान के लिए व्यावहारिक विकल्प सुझाए और सरकार को ऐसे विकल्प तैयार करने में मदद करे, जिनसे एक अच्छी टैक्स पॉलिसी बन सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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