
गांधीनगर, 16 सितंबर (हि.स.)। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता-2026 के तहत नई दिल्ली में 10 से 15 सितंबर तक आयोजित ब्रिक्स बाजार में 18 देशों के 44 कारीगरों ने अपनी पारंपरिक हस्तकला और रचनात्मक परंपराओं का प्रदर्शन किया। ‘शिल्प से संस्कृति, लोगों से जुड़ाव’ थीम पर आयोजित बाजार का संयोजन निफ्ट गांधीनगर ने विदेश मंत्रालय और विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय के परामर्श से किया।
राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय एवं हस्तकला अकादमी में आयोजित बाजार में भारत के अलावा बेलारूस, बोलीविया, ब्राजील, चीन, क्यूबा, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, रूस, दक्षिण अफ्रीका, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम के कारीगरों ने अपनी विशिष्ट हस्तकलाओं और रचनात्मक परंपराओं को प्रस्तुत किया।
बाजार में हस्तनिर्मित वस्त्र, विलो बुनाई, मनका कला, लाख कला, प्राकृतिक छपाई, कागज की लुगदी से बनी कला, मिट्टी के बर्तन, बुनाई, चित्रकला, प्रतिमा निर्माण, लकड़ी एवं लौकी की कला, बाटिक और गर्म एनामेल कला सहित अनेक पारंपरिक शिल्प प्रदर्शित किए गए।
ब्रिक्स बाजार का विशेष आकर्षण निफ्ट गांधीनगर द्वारा तैयार किए गए तीन विषय आधारित कला-स्थापत्य रहे—‘एक संगम : एकता के पैटर्न’, ‘सांस्कृतिक संगम : एक साथ बुनी संस्कृतियां’ और ‘सह-अस्तित्व : जीवन वृक्ष’।
‘एक संगम : एकता के पैटर्न’ में ब्रिक्स के 21 सदस्य एवं साझेदार देशों की हस्तकला परंपराओं और दृश्य भाषा से प्रेरित 21 अलग-अलग पैटर्न को एक साथ प्रस्तुत किया गया। विभिन्न सांस्कृतिक पहचानों को एक ही दृश्य संरचना में पिरोकर एकता, संवाद और आपसी जुड़ाव का संदेश दिया गया।
वहीं ‘सांस्कृतिक संगम : एक साथ बुनी संस्कृतियां’ में बुनाई को विभिन्न संस्कृतियों के मिलन के रूपक के रूप में प्रस्तुत किया गया। ‘सह-अस्तित्व : जीवन वृक्ष’ के माध्यम से विभिन्न संस्कृतियों, समुदायों और प्रकृति के बीच परस्पर जुड़ाव तथा सह-अस्तित्व की भावना को अभिव्यक्त किया गया।
आगंतुकों को कारीगरों और उनकी हस्तकला की पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक स्टॉल पर विशेष परिचय पैनल और क्यूआर कोड लगाए गए थे। क्यूआर कोड के माध्यम से लोग संबंधित कारीगर की जानकारी, उनकी हस्तकला और संपर्क विवरण तक पहुंच सकते थे।
इस पहल के जरिए पारंपरिक हस्तकला को डिजिटल कहानी-कथन के साथ जोड़ा गया, जिससे आगंतुकों को कला और कलाकार दोनों को समझने का नया अनुभव मिला।
बाजार के दौरान विभिन्न पारंपरिक हस्तकलाओं के जीवंत प्रदर्शन भी आयोजित किए गए। मध्य प्रदेश की ब्लॉक छपाई, राजस्थान की लाख की चूड़ियां, कश्मीर की कागज की लुगदी से बनी कला और राजस्थान की टेराकोटा हस्तकला की प्रस्तुति ने आगंतुकों को कारीगरों की कुशलता और उनकी रचनात्मक प्रक्रिया को करीब से देखने का अवसर दिया। कुछ गतिविधियों में आगंतुकों ने कारीगरों के साथ मिलकर हस्तकला तैयार करने का अनुभव भी प्राप्त किया।
ब्रिक्स बाजार 2026 ने हस्तकला को केवल बिक्री या प्रदर्शनी की वस्तु के बजाय संवाद, सांस्कृतिक समझ और लोगों के बीच जुड़ाव का माध्यम बनाया। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान आयोजित इस जनभागीदारी पहल में विभिन्न देशों की सांस्कृतिक पहचान को एक साझा मंच मिला।
विभिन्न देशों की कला, परंपरा और रचनात्मकता को एक मंच पर लाने वाला यह आयोजन इस मायने में भी खास रहा कि यहां हस्तकला के माध्यम से संस्कृतियों के बीच संवाद और लोगों के बीच जुड़ाव की कहानी प्रस्तुत की गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे