
इंदौर, 17 सितम्बर (हि.स.)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मध्य प्रदेश के इंदौर में 307.44 करोड़ रुपये के कथित बैंक ऋण घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक और कार्रवाई की है। ईडी ने इंदौर के हुकमाखेड़ी गांव में मेसर्स विश्वकर्मा क्रिएशन्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम दर्ज तीन व्यावसायिक भूखंडों को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) किया है। इन संपत्तियों की अनुमानित कीमत करीब 3.91 करोड़ रुपये है।
ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय ने गुरुवार को जानकारी दी कि एजेंसी ने दो अलग-अलग एफआईआर के आधार पर इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। पहली एफआईआर सीबीआई की भोपाल स्थित भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने उत्कर्ष त्रिवेदी और अन्य के खिलाफ दर्ज की थी।
ईडी के अनुसार, जांच में सामने आए वित्तीय लेनदेन से इन संपत्तियों का संबंध कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी रकम से पाया गया है। जांच में सामने आया कि बैंक से लिए गए ऋण की रकम को निर्धारित उद्देश्य के बजाय दूसरी संस्थाओं के माध्यम से स्थानांतरित कर संपत्तियां खरीदने में इस्तेमाल किया गया। इसमें पंजाब नेशनल बैंक के साथ 57.47 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी का मामला शामिल है।
दूसरी एफआईआर आर्थिक अपराध शाखा, मुंबई ने एनसीआईएल, उसके निदेशकों सुनील कुमार त्रिवेदी, उत्कर्ष त्रिवेदी और अन्य के खिलाफ दर्ज की थी। इसमें भारतीय स्टेट बैंक को 249.97 करोड़ रुपये का कथित नुकसान पहुंचाने का आरोप है। दोनों मामलों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को कुल 307.44 करोड़ रुपये के नुकसान का आरोप है।
ईडी की जांच के मुताबिक एनसीआईएल और उससे जुड़ी कंपनियों के ऋण खातों से रकम दूसरी संस्थाओं में ट्रांसफर किए जाने के साक्ष्य मिले। एजेंसी का आरोप है कि इन लेनदेन में सुनील कुमार त्रिवेदी और उत्कर्ष त्रिवेदी के नियंत्रण वाली संस्थाओं का इस्तेमाल किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि विश्वकर्मा क्रिएशन्स प्राइवेट लिमिटेड को एनसीआईएल से जुड़ी कुछ मध्यस्थ संस्थाओं के जरिए रकम मिली थी। ईडी के अनुसार, कंपनी ने इस रकम का इस्तेमाल बैंक से लिए गए ऋण के निर्धारित उद्देश्य के बजाय संपत्तियां खरीदने में किया।
इसी रकम से हुकमाखेड़ी में खरीदे भूखंड
वित्तीय लेनदेन की जांच के आधार पर ईडी ने दावा किया कि विश्वकर्मा क्रिएशन्स ने एनसीआईएल और उससे जुड़ी संस्थाओं से प्राप्त रकम का इस्तेमाल संपत्तियां खरीदने में किया। इसी आधार पर हुकमाखेड़ी गांव में कंपनी के नाम दर्ज तीन व्यावसायिक भूखंडों को पीएमएलए के तहत अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है। इनकी कुल अनुमानित कीमत करीब 3.91 करोड़ रुपये बताई गई है।
ब्रिटेन में करीब 2 करोड़ की संपत्ति पहले अटैच
इस मामले में ईडी इससे पहले विदेश स्थित करीब 2 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्ति भी कुर्क कर चुकी है। यह संपत्ति 24 सिग्नेट एवेन्यू, फेल्थम, मिडलसेक्स, टीडब्ल्यू 14 0 डीएक्स पर स्थित बताई गई है। ईडी के मुताबिक बैंक ऋण से जुड़े इस मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच अभी जारी है। अस्थायी कुर्की का उद्देश्य जांच के दौरान संबंधित संपत्तियों को सुरक्षित रखना है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर