करीब 5 हजार रोहिंग्याओं की वापसी को मंजूरी, म्यांमार से बातचीत करेंगे मलेशियाई पीएम

17 Sep 2026 09:33:53
रोहिंग्या शरणार्थी (फाइल फाेटाे)


कुआलालंपुर, 17 सितंबर (हि.स.)। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने बुधवार को कहा कि वह म्यांमार के सैन्य शासन के प्रमुख से राष्ट्रपति बने मिन आंग ह्लाइंग को आधिकारिक यात्रा के लिए आमंत्रित करेंगे। इस दौरान मलेशिया हजारों रोहिंग्या शरणार्थियों की म्यांमार वापसी के मुद्दे पर बातचीत करेगा।

अनवर ने कहा कि मलेशिया और म्यांमार की मौजूदा सरकार को औपचारिक मान्यता देने के लिए तैयार नहीं हैं, लेकिन शरणार्थियों की वापसी जैसे मुद्दों पर बातचीत के लिए म्यांमार के साथ संवाद जरूरी है। उन्होंने कहा कि कूटनीतिक बातचीत के जरिए ही रोहिंग्या शरणार्थियों की सुरक्षित और चरणबद्ध वापसी का रास्ता निकाला जा सकता है।

अनवर के मुताबिक, म्यांमार ने करीब 5,000 शरणार्थियों की वापसी को मंजूरी दी है। उनकी वापसी का खर्च मलेशिया उठाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि शुरुआती चरण के बाद अन्य शरणार्थियों की वापसी भी चरणबद्ध तरीके से संभव होगी।

मलेशिया ने इससे पहले कहा था कि स्वैच्छिक वापसी कार्यक्रम के पहले चरण के तहत सितंबर में करीब 1,500 म्यांमार शरणार्थियों को वापस भेजने की योजना है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) के अनुसार, म्यांमार लौटना रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए अभी सुरक्षित नहीं माना जाता।

मिन आंग ह्लाइंग ने 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद सत्ता संभाली थी। अप्रैल में राष्ट्रपति बनने के बाद से वह विदेश यात्राओं और आधिकारिक दौरों के जरिए अपनी सरकार के लिए अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

अनवर ने कहा कि मलेशिया पहले म्यांमार की सैन्य सरकार का मुखर आलोचक रहा है और संघर्ष रोकने से इनकार करने पर उसने कई बार निराशा जताई है। हालांकि, अब शरणार्थियों की वापसी के लिए म्यांमार के साथ व्यावहारिक बातचीत की जरूरत है।

मिन आंग ह्लाइंग हाल के महीनों में लाओस, थाईलैंड, कंबोडिया और वियतनाम के अलावा चीन, भारत और रूस का भी दौरा कर चुके हैं। मलेशिया की यात्रा होने पर वह आसियान के 11 सदस्य देशों में से पांचवें देश का दौरा करेंगे।

रोहिंग्या म्यांमार का एक उत्पीड़ित अल्पसंख्यक समुदाय है। बड़ी संख्या में रोहिंग्या लंबे समय से म्यांमार से भागकर पड़ोसी देशों में शरण लेते रहे हैं। बांग्लादेश में दस लाख से अधिक रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं, जबकि मलेशिया में भी बड़ी संख्या में म्यांमार से आए शरणार्थी मौजूद हैं।

अनवर ने रोहिंग्या समुदाय की परेशानियों को स्वीकार करते हुए कहा कि मलेशिया उन्हें स्थायी रूप से अपने यहां नहीं रख सकता। उनका कहना है कि समाधान के लिए म्यांमार से बातचीत और कूटनीति जरूरी है।

मलेशिया के प्रधानमंत्री ने कहा कि म्यांमार पर केवल दबाव बनाने के बजाय संवाद के जरिए शरणार्थियों की वापसी का रास्ता तलाशना अधिक व्यावहारिक होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

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