तेलंगाना का ‘गोल्लाला गुड़ी’ मंदिर राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित

02 Sep 2026 18:25:53
पालमपेट गांव स्थित 'गोल्लाला गुड़ी' मंदिर


पालमपेट स्थित 'गोल्लाला गुड़ी' मंदिर


हैदराबाद, 02 सितंबर (हि.स.)। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने तेलंगाना के मुलुगु जिले के पालमपेट गांव स्थित 'गोल्लाला गुड़ी' मंदिर को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक अधिसूचित किया है। यह मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल काकतीय रुद्रेश्वर (रामप्पा) मंदिर के दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थित है।

माना जाता है कि काकतीय शासन के दौरान 12वीं-13वीं शताब्दी में इस मंदिर का निर्माण किया गया था।

बुधवार को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, 31 अगस्त 2026 को भारत के राजपत्र (असाधारण), भाग II, खंड 3, उप-खंड (ii) में एएसआई अधिसूचना संख्या एस.ओ. 4802(ई) प्रकाशित की गई है।

गोल्लाला गुड़ी एक 'त्रिकूटालय' (तीन गर्भगृहों वाला) मंदिर है, जिसमें पूर्व की ओर मुख वाला एक मंडप है जो तीन गर्भगृहों से घिरा हुआ है। इसकी पैरापेट (मुंडेर) मूर्तियों से सुसज्जित है और इसके एंटाब्लेचर (स्तंभ-शिरोभाग) व द्वारों पर तराशे गए हंसो की पंक्तियां और जालीदार काम है, जो इस मंदिर की प्रमुख विशेषताएं हैं।

मंदिर के सामने दो अलग (स्वतंत्र) तीर्थस्थल हैं, जो खूबसूरती से तराशे गए हैं और 'द्वारपालों' की आकृतियों से सजे हैं। उनके सामने अंतराल (एंटी-चेंबर) हैं, जो बारीक कॉर्निस (छज्जों) और जालियों (स्क्रीन्स) से सजाए गए हैं।

मुख्य मंदिर की संरचना में सामने एक प्रवेश मंडप है, जो मुख्य हॉल के केंद्र की ओर जाता है। इसके उत्तर, दक्षिण और पश्चिम की तरफ अंतरालों के साथ तीन गर्भगृह हैं। दीवारों में विभिन्न देव-कोष्ठ (ताक) हैं, जिनमें भगवान विष्णु, लक्ष्मी, गणेश और महिषासुरमर्दिनी की मूर्तियों हैं। यह मंदिर पशु आकृतियों और पुष्प डिजाइनों से सजी एक ऊंची जगती (प्लिंथ) पर खड़ा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / Dev Kumar Pukhraj

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