सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु को कम करना सभी का साझा दायित्व: न्यायमूर्ति सप्रे

02 Sep 2026 19:03:53
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति की बैठक को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे


सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति की बैठक को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे


- न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे की अध्यक्षता में इंदौर में हुई सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति की बैठक

इंदौर, 02 सितंबर (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु को कम करना सभी संबंधित विभागों और समाज का साझा दायित्व है। मध्य प्रदेश में पिछले कुछ समय में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु में कमी आई है, जो संतोषजनक है लेकिन इसे और बेहतर करने के लिए लगातार प्रयास करने होंगे।

न्यायमूर्ति सप्रे बुधवार को इंदौर में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे। सिटी बस ऑफिस में हुई बैठक में इंदौर जिले में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम, सड़क सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा दुर्घटनाओं में होने वाली जनहानि को नियंत्रित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की विस्तार से समीक्षा की गई।

बैठक में अधिकारियों द्वारा जिले में सड़क सुरक्षा के लिए किए जा रहे विभिन्न कार्यों की जानकारी दी गई। ब्लैक स्पॉट के चिन्हांकन एवं सुधार, सड़क सुरक्षा को लेकर जन-जागरूकता अभियान, यातायात नियमों के उल्लंघन पर चालानी कार्रवाई, यातायात व्यवस्था में सुधार, सड़क इंजीनियरिंग से संबंधित सुधारात्मक कार्य तथा सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु को नियंत्रित करने के लिए किए जा रहे उपायों की विस्तार से जानकारी प्रस्तुत की गई।

बैठक में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में आवश्यक सुधार, यातायात व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने तथा सड़क सुरक्षा के प्रति आम नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी चर्चा हुई। न्यायमूर्ति सप्रे ने सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ प्रभावी एवं परिणाममूलक कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

बैठक में न्यायमूर्ति सप्रे ने बताया कि देश में पिछले पांच वर्षों के सड़क दुर्घटना के आंकड़ों के आधार पर अधिक मृत्यु वाले जिलों की पहचान कर उन्हें ‘जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट’ के रूप में विकसित करने की पहल की गई है। मध्य प्रदेश में पहले धार, खरगोन, रीवा, सतना, सागर और जबलपुर को ऐसे जिलों में शामिल किया गया था। अब इसमें इंदौर, भोपाल और उज्जैन को भी शामिल कर कुल नौ जिलों को जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने कहा कि ‘जीरो फैटलिटी’ का अर्थ केवल घोषणा करना नहीं, बल्कि ऐसा वातावरण तैयार करना है जिसमें सड़क दुर्घटनाओं में एक भी व्यक्ति की मृत्यु न हो। इसके लिए पुलिस, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, परिवहन विभाग, स्वास्थ्य विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को समन्वित रूप से काम करना होगा।

न्यायमूर्ति सप्रे ने कहा कि इंदौर को प्रदेश का प्रमुख और तेजी से विकसित होता शहर होने के कारण, उज्जैन को धार्मिक एवं पर्यटन महत्व तथा बड़े पैमाने पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के कारण तथा भोपाल को राजधानी होने के कारण जीरो फैटलिटी अभियान में शामिल करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अब तक जो हुआ, उसे पीछे छोड़कर भविष्य के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ काम करने की जरूरत है। सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली प्रत्येक मृत्यु को रोकना ही सड़क सुरक्षा से जुड़े प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी का प्रमुख ध्येय होना चाहिए।

पैदल चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार

न्यायमूर्ति सप्रे ने उच्चतम न्यायालय के हालिया आदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि सड़क पर सुरक्षित रूप से पैदल चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। यदि किसी सड़क पर पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ या सुरक्षित मार्ग उपलब्ध नहीं है और इसी वजह से दुर्घटना होती है, तो इसके लिए संबंधित सरकारी एजेंसियों की जवाबदेही तय हो सकती है।

उन्होंने कहा कि नगर निगम, लोक निर्माण विभाग और अन्य सड़क निर्माण एजेंसियों को सड़क डिजाइन करते समय पैदल यात्रियों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित फुटपाथ की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। फुटपाथ उपलब्ध होने के बावजूद यदि कोई व्यक्ति उसका उपयोग नहीं करता है तो स्थिति अलग है, लेकिन जहां फुटपाथ बनाया ही नहीं गया है, वहां पैदल चलने वाले व्यक्ति के पास सड़क पर चलने के अलावा विकल्प नहीं रहता।

उन्होंने सड़क किनारे बैठे, खड़े अथवा घूमते रहने वाले लोगों तथा सड़कों पर मौजूद अवरोधों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल वाहन चालकों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि सड़क का डिजाइन, फुटपाथ, अतिक्रमण, यातायात व्यवस्था और सड़क पर मौजूद बाधाओं को दूर करना भी संबंधित सरकारी विभागों की जिम्मेदारी है।

न्यायमूर्ति सप्रे ने अधिकारियों से आह्वान किया कि सभी विभाग मिलकर ऐसा रोड सेफ्टी सिस्टम विकसित करें, जिसमें वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल यात्रियों और अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके। बैठक में नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल, ट्रैफिक डीसीपी राजेश त्रिपाठी, स्मार्ट सिटी के सीईओ अर्थ जैन, अपर कलेक्टर नवजीवन विजय पवार, रिंकेश वैश्य सहित सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

Powered By Sangraha 9.0