
नई दिल्ली, 23 सितंबर (हि.स.)। भारतीय रेलवे ने दक्षिण मध्य रेलवे (एससीआर) में पहली बार कवच 4.0 को सफलतापूर्वक चालू कर रेल सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हैदराबाद मंडल के मलकानगिरी-कामारेड्डी खंड में 108 रूट किलोमीटर पर कवच 3.2 को उन्नत कर कवच 4.0 किया गया है।
रेल मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि दक्षिण मध्य रेलवे में कवच 3.2 के 1,465 रूट किलोमीटर पर इस्तेमाल से मिले अनुभवों के आधार पर कवच 4.0 में कई तकनीकी सुधार किए गए हैं। इसे देशभर में बड़े पैमाने पर लागू करने की योजना है।
कवच 4.0 में ट्रेन के स्थान की अधिक सटीक जानकारी देने की क्षमता जोड़ी गई है। बड़े यार्ड में सिग्नल की स्थिति की बेहतर जानकारी, ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) के जरिये स्टेशन से स्टेशन तक कवच इंटरफेस तथा मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली के साथ सीधे इंटरफेस की सुविधा भी इसमें शामिल है।
कवच स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली है, जो लोको पायलट को निर्धारित गति सीमा में ट्रेन चलाने में मदद करती है और जरूरत पड़ने पर स्वत: ब्रेक लगा सकती है। इसका उद्देश्य सिग्नल पार करने की स्थिति (एसपीएडी) को रोकने, महत्वपूर्ण परिस्थितियों में ट्रेन की गति नियंत्रित करने और टक्कर के जोखिम को कम करने में मदद करना है।
कवच के लिए स्टेशनों और ब्लॉक खंडों में स्टेशन कवच, पूरे ट्रैक पर आरएफआईडी टैग, संचार टावर, पटरियों के किनारे ओएफसी तथा ट्रेनों के इंजनों में लोको कवच जैसी तकनीकी सुविधाएं स्थापित करनी होती हैं। रेल मंत्रालय के अनुसार, यह सुरक्षा प्रणाली उच्चतम सुरक्षा प्रमाणन स्तर सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-4 (एसआईएल-4) की आवश्यकताओं को पूरा करती है।
रेल मंत्रालय ने कहा कि दक्षिण मध्य रेलवे में कवच 4.0 का सफल परिचालन स्वदेशी रेल सुरक्षा तकनीक को मजबूत करने और भारतीय रेलवे के विभिन्न हिस्सों में उन्नत स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार