
कोलकाता, 23 सितंबर (हि.स.)। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तत्काल गिरफ्तारी और राज्य में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) से पहले वाली मतदाता सूची के आधार पर नए सिरे से विधानसभा चुनाव कराने की मांग की है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और चुनाव आयोग ने मिलकर इस साल की शुरुआत में हुए चुनावों में धांधली की है।
उनकी यह तीखी प्रतिक्रिया उन हालिया रिपोर्टों के बाद आई है, जिनमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने देशभर में एसआईआर के दौरान विभिन्न राज्यों में नामों को हटाए जाने सहित कई अहम मुद्दों पर चिंता जताई थी। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने पिछले 10 महीनें में एसआईआर से संबंधित फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई थी। इनमें से कुछ फैसले कथित तौर पर उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे। इस खुलासे के बाद एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
फेसबुक लाइव के माध्यम से जनता को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अब यह पूरी तरह से साबित हो गया है कि चुनाव आयोग और सत्ताधारी दल ने मिलकर पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों को लूटा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर बने रहेंगे, तब तक पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन होंगे। ममता ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को तुरंत गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे डाल दिया जाना चाहिए, क्योंकि यह संवैधानिक पद उनके जैसे व्यक्ति के लिए नहीं है। उन्होंने इसे समझौते वाले चुनाव आयुक्त और देश को बर्बाद करने वाली ताकतों से आजादी की एक और लड़ाई करार दिया और पुरानी मतदाता सूची के आधार पर फिर से चुनाव कराने का आह्वान किया।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर सफाई देते हुए कहा है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े सभी निर्णय तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति और पूर्ण मंजूरी से ही लिए गए थे। इस बीच, ममता बनर्जी ने जानकारी दी कि विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के घटक दलों ने इस गंभीर मामले पर आपस में चर्चा की है और जल्द ही इस संबंध में एक अहम बैठक आयोजित की जाएगी।
गौरतलब है कि, यह नया विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ ही दिन पहले चुनाव आयोग ने पार्टी पर नियंत्रण को लेकर चल रहे आंतरिक गुटीय विवाद के बीच 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' के नाम और उसके आरक्षित 'फूल और घास' वाले पारंपरिक चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। इसके बाद आयोग ने आगामी 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों के लिए दोनों गुटों को अलग-अलग अंतरिम पहचान आवंटित की थी। ममता गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' का चुनाव चिह्न मिला है, जबकि अरूप रॉय के नेतृत्व वाले विरोधी गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / गंगा