राष्ट्रपति ट्रंप की एक ही शर्त, ईरान को शांति समझौता चाहिए तो पहले परमाणु कार्यक्रम छोड़ेः रुबियो

24 Sep 2026 07:23:53
अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट (विदेशमंत्री) मार्को रुबियो । फोटो - ग्रैब


न्यूयॉर्क, 24 सितंबर (हि.स.)। अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट (विदेशमंत्री) मार्को रुबियो ने कहा है कि ईरान से अगर समझौता होता है तो उसे हर हाल में अपना परमाणु कार्यक्रम छोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शांति समझौता करने के लिए तैयार हैं। मगर एक शर्त के साथ। वह शर्त है ईरान को परमाणु हथियारों का मोह त्यागना होगा। तब समझौता होगा और ईरान फिर महान देश बन सकेगा। उन्होंने 23 सितंबर को न्यूयॉर्क के आलीशान पैलेस होटल में खचाखच भरे संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों के ईरान मुद्दे के अलावा अन्य सवालों के सौहार्दपूर्ण माहौल में जवाब दिए। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट (विदेश मंत्रालय) की वेबसाइट ने सवाल-जवाब के अलावा संवाददाता सम्मेलन का वीडियो साझा किया है।

संवाददाता सम्मेलन में पहुंचते ही रुबियो ने कहा कि ठीक है, आगे बढ़िए। उनसे पहला सवाल ईरान पर पूछा गया- कल ईरानियों के साथ अमेरिका की क्या मांगें थीं और क्या समझौता (एमओयू)में लौटने पर कोई चर्चा हुई या अमेरिका के लिए शर्तें बदल गई हैं? विदेशमंत्री रुबियो ने कहा, ''देखिए, कल की बातचीत उस प्रक्रिया में शामिल कुछ मध्यस्थों के साथ हुई। मैं इसे किसी एक दिशा में नहीं बताना चाहता। मुझे लगता है कि इसकी समझ बिल्कुल साफ है। याद रखिए, यहां सबसे मुख्य मुद्दा – जिसे राष्ट्रपति ने कल दुनिया के सामने अपने भाषण में जोर देकर कहा – वह यह है कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं हो सकते। सब कुछ इसी बात से जुड़ा है।''

उन्होंने कहा, '' हम समझते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य एक मुद्दा है। जलडमरूमध्य का दक्षिणी रास्ता खुला है। हर दिन वहां से ज्यादा से ज्यादा तेल के बैरल गुजर रहे हैं। यह रास्ता अमेरिकी सेना की कोशिश की वजह से खुला है। अमेरिकी सेना जहाजों की सुरक्षा भी कर रही है और उसने बारूदी सुरंगें (माइंस) भी हटाई हैं। और यह सिलसिला जारी रहेगा। इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य में एकमात्र नाकाबंदी वह है जो हमने ईरान पर लगाई है, क्योंकि तेहरान जहाजों पर लगातार हमले कर रहा है।आज सुबह भी उसने ऐसा ही किया। अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य को खुलवाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह भी मुद्दा है।''

रुबियो ने कहा, ''लेकिन मुख्य मुद्दा यह है कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं हो सकते। हम हर बातचीत में यह बात रखते हैं। मैं इन बैठकों के बारे में कुछ नहीं कहना चाहता, क्योंकि अगर ईरान के साथ कोई समझौता होता है तो वह प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं होगा। इसमें लंबा समय लगेगा। इस प्रक्रिया में मध्यस्थ भी शामिल होंगे। राष्ट्रपति ने कहा है कि वे समझौते के लिए तैयार हैं, जिससे ईरान महान और समृद्ध देश बन सके। अगर ईरान न्यूक्लियर हथियार पाने की अपनी इच्छा पर अड़ा रहता है तो यह उसके लिए अच्छा नहीं होगा। ईरान दुनिया में आतंकवाद को सबसे ज्यादा बढ़ावा देने वाला देश है। राष्ट्रपति ट्रंप के पास कई विकल्प हैं। सैन्य विकल्प भी है। उसके बारे में मैं कोई अंदाजा नहीं लगाऊंगा।''

अमेरिकी विदेशमंत्री ने क्यूबा के आजादी के सवाल पर कहा, हां वह आजाद होगा। इस पर कई पूरक सवाल पूछे गए। रुबियो ने कहा, '' क्यूबा की क्रांति – मैं जवाब देना चाहता हूं। क्यूबा की क्रांति नाकाम रही है। सवाल यह है कि अब क्या होगा। मुझे लगता है कि क्यूबा के पास बदलाव करने का मौका है।इसमें राजनीतिक और आर्थिक आजादी दोनों ही शामिल हैं। हम आगे ऐसे कदम उठाने के लिए तैयार हैं जिनसे बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो सके। यह प्रक्रिया आसान नहीं होगी। हमने दुनिया भर में इतिहास में ऐसे बदलाव होते देखे हैं। वे रातों-रात नहीं होते। कोई भी 60 साल से ज्यादा समय से चले आ रहे कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और अक्षमता को छह महीने में ठीक नहीं कर सकता।''

उनसे यह पूछा गया कि क्या क्यूबा में वेनेजुएला जैसा कुछ हो सकता है?रुबियो ने कहा, '' अमेरिका पहले है। अगर संयुक्त राज्य अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को क्यूबा से कोई खतरा होता है तो राष्ट्रपति के पास उससे निपटने की शक्ति और जिम्मेदारी दोनों होती हैं। मैं इससे आगे कोई अनुमान नहीं लगाऊंगा। मैं बस इतना कहूंगा कि क्यूबा और उसके नेताओं या जो लोग अभी सरकार चला रहे हैं, उनके पास उस देश को हमेशा के लिए सकारात्मक रूप से बदलने की प्रक्रिया शुरू करने का मौका है। क्यूबा की सरकार में कुछ ऐसे लोग हैं जिनके साथ हम कभी काम नहीं कर सकते ,क्योंकि उनके हाथ खून से सने हैं। ''

एक संवाददाता ने सवाल पूछा- राष्ट्रपति ने कल कहा था कि उन्हें लगता है कि मध्यावधि चुनाव के बाद अमेरिका ईरान के साथ कोई समझौता करेगा। ईरानियों की तरफ से आपको क्या संकेत मिले हैं जिनसे लगता है कि ऐसा हो सकता है? रुबियो ने कहा, ''मुझे लगता है कि ईरानी हमारे सिस्टम को ठीक से समझ नहीं पाए हैं। मुझे लगता है कि ईरानियों को यह गलतफहमी है कि नवंबर में डेमोक्रेट्स जीतेंगे और राष्ट्रपति उनके खिलाफ कोई कदम नहीं उठा पाएंगे। जब देश की राष्ट्रीय सुरक्षा की बात आती है, जब प्रतिबंध लगाने या मिलिट्री फ़ोर्स का इस्तेमाल करने की बात आती है तो राष्ट्रपति के पास असाधारण शक्तियां होती हैं। मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ने कल यह साफ कर दिया था कि उनके लिए ईरान का मुद्दा कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है। हर अमेरिकी राष्ट्रपति और सच कहूं तो दुनिया के ज्यादातर देश इस बात से सहमत हैं कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए।''

रुबियो से फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के 'जंगल राज की वापसी' संबंधी सवाल को प्यारे अंदाज में घुमा गए। उन्होंने कहा, ''क्या आपको अपना माइक खुद पकड़ना पड़ रहा है? अरे यार, इसे ठीक करवाना होगा।'' उन्होंने कहा, ''मैंने राष्ट्रपति मैक्रों का भाषण नहीं सुना। मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ने भी कहा है – संयुक्त राष्ट्र में बहुत क्षमता है, लेकिन वह उस पर खरा नहीं उतर रहा है। मुझे लगता है कि कई नेताओं का भी यही मत है। कुछ लोग कह रहे हैं कि संयुक्त राष्ट्र अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है। हां, उसे सही भूमिका पर वापस लाने की जरूरत है। उदाहरण के लिए, थाईलैंड और कंबोडिया के बीच हुई लड़ाई, या भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित टकराव, या डीआरसी और रवांडा में जो हो रहा है, या सूडान में जो हो रहा है, या ईरान के साथ जलडमरूमध्य में जो हो रहा है, उससे निपट सकता।''

इस संवाददाता सम्मेलन में ईरान का मुद्दा ही गूंजता रहा। रुबियो ने कहा कि उन्हें लगता है कि इस बात पर आम सहमति है कि जलडमरूमध्य खुला हो। वहां शांति हो। वहां कोई हमला न हो। इस बात पर आम सहमति है कि हूती और यमन में जो हो रहा है, वह बहुत बड़ी समस्या है। इसलिए आर्थिक प्रतिबंधों के अलावा विमानन प्रतिबंध भी लगाए गए है्ं। उन्होंने सर्बिया की बदलती भूमिका पर पूछे गए सवाल को हंसते हुए टाल दिया। उन्होंने रूस और यूक्रेन युद्ध के बारे में भी जवाब दिए। रुबियो ने कहा, ''हम सभी चाहते हैं कि यह युद्ध खत्म हो। रूस और यूक्रेन के बारे में मैं एक बात कहूंगा, वह यह है कि ''युद्ध'' युद्ध के मैदान में खत्म नहीं होने वाला है। वह युद्ध खत्म होगा – संवाद से और समझौते से। राष्ट्रपति ट्रंप भी यही चाहते हैं।''

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद

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