नवधा भक्ति के नौ सूत्रों से हमारा जीवन और अधिक सुविचारित हो सकता है: सच्चिदानंद जोशी

26 Sep 2026 14:39:53
आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी के साथ अन्य लोग मौजूद।


नई दिल्ली, 25 सितंबर (हि.स.)। भारतीय विरासत संस्थान (आईआईएच) के कुलपति एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने शुक्रवार को कहा कि अगर हम नवधा भक्ति के नौ सूत्रों को अपने सामने रखें तो हमें लगता है कि उससे हमारा जीवन कैसे और अधिक परिष्कृत और अधिक सुविचारित हो जाएगा।

डॉ. जोशी ने आज नोएडा स्थित आईआईएच में छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक एवं धार्मिक तीर्थस्थल शिवरीनारायण की सांस्कृतिक धरोहर पर आधारित वृत्तचित्र ‘शबरी के राम’ की विशेष स्क्रीनिंग के आयोजन पर यह बात कही। उन्होंने कहा कि शबरी का चरित्र और भगवान श्रीराम द्वारा उन्हें दिया गया नवधा भक्ति का उपदेश हम सभी के जीवन को परिष्कृत एवं उन्नत बनाने की शाश्वत प्रेरणा देता है।

डॉ. जोशी ने वृत्तचित्र की सराहना करते हुए कहा, शबरी के राम’ भाव की भाषा कहती है और आस्था तथा विरासत के बीच सेतु का कार्य करती है। हम सभी अपने-अपने तरीके से आराध्य की उपासना करते हैं, लेकिन प्रभु श्रीराम द्वारा शबरी को दिया गया नवधा भक्ति का साक्षात्कार अप्रतिम है। जब भी हम शबरी का स्मरण करते हैं, स्वयं को आंतरिक रूप से परिष्कृत और उन्नत पाते हैं। इस वृत्त चित्र के निर्माता-निर्देशक डॉ. शाहिद अली हैं।

वृत्तचित्र ‘शबरी के राम’ छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में महानदी, शिवनाथ और जोंक नदी के पावन संगम पर स्थित शिवरीनारायण मंदिर की ऐतिहासिक, धार्मिक एवं स्थापत्य परंपरा को सजीव रूप में प्रस्तुत करता है।

फिल्म में स्थानीय लोकविश्वासों, नदी संगमों के महत्व और माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक चलने वाले ऐतिहासिक वार्षिक मेले को प्रमुखता से दिखाया गया है। साथ ही, पुरी के जगन्नाथ मंदिर में स्थापित भगवान जगन्नाथ की मूल प्रतिमा के शिवरीनारायण से जुड़े पारंपरिक विश्वास को भी दस्तावेजी रूप में दर्ज किया गया है। इसका उद्देश्य क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

स्क्रीनिंग के दौरान पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजीत पाठक और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (पश्चिम) एसपी सिंह उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि इस वृत्तचित्र की पटकथा वरिष्ठ पत्रकार इकबाल रिजवी ने लिखी है, जबकि छायांकन, शोध और सह-संपादन का कार्य चंद्रशेखर कश्यप ने किया है। कार्यक्रम के अंत में फिल्म निर्माण से जुड़े सदस्यों को सम्मानित किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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