इंदौर में दो दिवसीय राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान अलंकरण समारोह एवं संगीत संध्या रविवार से

26 Sep 2026 22:43:54
राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान अलंकरण समारोह का पोस्टर


- 'राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान - 2026 से अलंकृत होंगे संगीत निर्देशक शान्तनु मोइत्रा

इंदौर, 26 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन इन्दौर के सहयोग से दो दिवसीय राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान अलंकरण समारोह एवं संगीत संध्या का आयोजन रविवार, 27 सितम्बर से इंदौर में किया जा रहा है। समारोह में सुविख्यात संगीत निर्देशक शान्तनु मोइत्रा, मुम्बई को 'राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान - 2026 से अलंकृत किया जाएगा

संस्कृति विभाग के संचालक एनपी नामदेव ने शनिवार को बताया किसमारोह में पहले दिन 27 सितम्बर 2026 को सायं 7 बजे से अमर लता हमारी लता... संगीत संध्या आयोजित होगी। इसमें इंदौर के गायक कलाकार अभय आहूजा, विवेक भारद्वाज, संजोत बरोट, पद्मा शुक्ला, सुषमा राव, सिद्धार्थ दुबे, वैशाली चौहान, मुस्कान चौहान, सौम्या सिन्हा एवं दीपिका पुरोहित द्वारा गीत-संगीत की प्रस्तुति दी जाएगी। इस संगीत संध्या में प्रवेश नि:शुल्क रहेगा।

संस्कृति संचालक नावदेव ने बताया कि 28 सितम्बर 2026 को सायं 7 बजे से राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान अलंकरण समारोह एवं संगीत संध्या का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर संगीत निर्देशक शान्तनु मोइत्रा को सम्मानित किया जाएगा। सम्मान स्वरूप कर मुक्त पांच लाख रुपये की राशि एवं प्रशस्ति पट्टिका प्रदान की जाएगी। अलंकरण समारोह के बाद सुविख्यात गायक जोड़ी सचेत - परम्परा की संगीत संध्या होगी। इस कार्यक्रम में प्रवेश नि:शुल्क रहेगा।

1984 में स्थापित हुआ राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान

नामदेव ने बताया कि सुगम संगीत के क्षेत्र में कलात्मक श्रेष्ठता को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से मध्यप्रदेश शासन द्वारा राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान वर्ष 1984 में स्थापित किया गया था। यह सम्मान बारी-बारी से संगीत रचना और गायन के लिए प्रदान किया जाता है। इस सम्मान से अब तक 42 विभूतियां अलंकृत हो चुकी हैं। विगत वर्ष आयोजित अलंकरण समारोह में वर्ष 2024 का संगीत निर्देशन के लिए शंकर – एहसान – लॉय, मुम्बई एवं वर्ष 2025 का पार्श्व गायन के लिए सोनू निगम, मुम्बई को अलंकृत किया गया था।

लगे रहो मुन्नाभाई, 3 इडियट्स, पीकू का संगीत बनाया

शान्तनु मोइत्रा भारतीय सिनेमा के उन संगीतकारों में हैं, जिनकी रचनाओं में सुरों की मधुरता के साथ संवेदनाओं, लोकधुनों और जीवन के अनुभवों की गहरी छाप दिखाई देती है। 22 जनवरी, 1968 को लखनऊ में जन्मे शान्तनु ने विज्ञापन जगत से संगीत की दुनिया में कदम रखा और आगे चलकर हिंदी सिनेमा के प्रमुख संगीतकार एवं बैकग्राउंड स्कोर कम्पोजर के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। ‘परिणीता’, ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’, ‘लगे रहो मुन्नाभाई’, ‘3 इडियट्स’, ‘मद्रास कैफे’, ‘पीकू’, ‘अक्टूबर’ एवं ‘12वीं फेल’ जैसी फिल्मों में उनका संगीत कहानी के भावों को स्वर देता है। उनकी कला को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला है। तेलुगु फिल्म ‘ना बंगारू तल्ली’ के लिए उन्हें 2014 में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन - बैकग्राउंड स्कोर) प्राप्त हुआ।

सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण

राज्य शासन के संस्कृति विभाग की निरन्तर अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं प्रसारित करने की परम्परा है। यह अलंकरण समारोह एवं संगीत संध्या उसी परम्परा का अनुसरण है। हमारे प्रदेश में अनेक महान विभूतियों का जन्म हुआ एवं उन्होंने कार्य भी किया। यह हम सभी प्रदेशवासियों के लिए गर्व का विषय है कि स्वर कोकिला भारत रत्न लता मंगेशकर का जन्म मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ। उन्होंने हजारों गीत गाये जो आज भी लोकप्रिय हैं। ऐसे आयोजनों से यही प्रयास होता है कि युवा पीढ़ी अपनी विरासत से परिचित हो एवं उसे आगे बढ़ाने का कार्य भी करे। संस्कृति विभाग द्वारा महान विभूतियों के नाम पर 20 से भी अधिक सम्मान स्थापित हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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