



लखनऊ, 27 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने रविवार को लखनऊ में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के प्रणेता और विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्रद्धेय अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी महोत्सव का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि जो लोग कभी राम मंदिर का विरोध करते थे और रामभक्तों पर गोलियां चलाते थे, आज वही खुद को रामभक्त बताने का प्रयास कर रहे हैं। यह विश्व हिन्दू परिषद की वैचारिक विजय है।
बिखरे हिंदू समाज को एक मंच पर लाए अशोक सिंघलमुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 1528 में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर तोड़े जाने के बाद करीब 500 वर्षों तक हिंदू समाज ने उसकी मुक्ति के लिए संघर्ष किया। संतों, नागाओं, सिख वीरों, युवाओं और महिलाओं ने बलिदान दिए। समाज में सामर्थ्य था, लेकिन ताकत बिखरी थी। इसे एक मंच पर लाने का काम अशोक सिंघल ने किया।
उन्होंने कहा कि 1982 में विश्व हिन्दू परिषद का दायित्व मिलने और 1983 में श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के गठन के बाद रामकाज अशोक सिंघल के जीवन का ध्येय बन गया। देश हो या विदेश, वनवासी क्षेत्र हो या दलित बस्ती, उनके मुख पर राम का नाम रहता था। राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहां बिश्राम को उन्होंने अपने जीवन में उतारा।
राम मंदिर के साथ समाज को भी जोड़ामुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अशोक सिंघल ने राम मंदिर आंदोलन के साथ समाज को एकजुट करने का भी अभियान चलाया। वनवासी और मलिन बस्तियों में एकल विद्यालयों की श्रृंखला खड़ी करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। पूर्वोत्तर के बच्चों की शिक्षा के लिए गोरखनाथ मंदिर स्थित विश्व हिन्दू परिषद कार्यालय के एक कमरे से भी व्यवस्था शुरू कराई गई।
उन्होंने 1990 के अयोध्या आंदोलन को याद करते हुए कहा कि तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार रामभक्तों पर गोलियां चला रही थी, तब अशोक सिंघल सत्ता के सामने नहीं झुके। दो नवंबर 1990 को रामभक्तों पर लाठीचार्ज और गोलीबारी के बीच भी उनकी सिंह गर्जना सुनाई दी। आज उनके सपनों का साकार स्वरूप अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के रूप में दिखाई दे रहा है।
कांग्रेस-सपा और वामपंथियों को घेरामुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर भगवान राम और कृष्ण के अस्तित्व को लेकर न्यायालय में सवाल खड़े करने का भी आरोप लगाया।उन्होंने कहा कि राम मंदिर के शिलान्यास और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में आमंत्रण मिलने के बावजूद ये लोग नहीं गए, क्योंकि उन्हें वोट बैंक दिखाई दे रहा था। अशोक सिंघल ने 1980 के दशक में जो ज्योति प्रज्वलित की थी, वह केवल राम जन्मभूमि तक सीमित नहीं थी, बल्कि भारत के मानबिंदुओं की पुनर्प्राण प्रतिष्ठा और गुलामी के चिह्नों को समाप्त करने का अभियान था।अशोक सिंघल को इसलिए स्मरण किया जाता है, क्योंकि उन्होंने जो कहा उसे करके दिखाया। वाणी तभी मंत्र बनती है, जब कथन और आचरण में अंतर न हो।
राम मंदिर आंदोलन ने बदला नैरेटिव: परांडेविश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा कि अशोक सिंघल ने भव्य राम मंदिर निर्माण की हिंदू समाज की सदियों पुरानी आकांक्षा को पूरा करने के लिए जीवन लगा दिया। राम जन्मभूमि आंदोलन ने हिंदू समाज में अपनी पहचान के प्रति गौरव बढ़ाया। उन्होंने सामाजिक समरसता और वेद शिक्षा के लिए अशोक सिंघल के कार्यों को भी याद किया। वेद विद्यालयों की स्थापना कराई।
अशोक सिंघल का संघर्ष वंदनीय: श्रीकृष्ण शाह विद्यार्थीकार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जगतगुरु श्रीकृष्ण शाह विद्यार्थी महाराज ने श्रीराम मंदिर के लिए अशोक सिंघल के संघर्ष को वंदनीय बताया। उन्होंने धर्म की मर्यादाओं और सिद्धांतों को अक्षुण्ण रखते हुए समाज को एकजुट करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, विधान परिषद सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह, भंते शील रतन, निर्मल सिंह, महंत अवधेश दास, महंत धर्मेंद्र दास, महंत दिव्या गिरी, विश्व हिन्दू परिषद के प्रांत अध्यक्ष कन्हैया लाल अग्रवाल, क्षेत्रीय संगठन मंत्री गजेंद्र, क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष प्रांत प्रचारक कौशल, प्रांत समरसता प्रमुख राजकिशोर और भारती गांधी समेत विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल व विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन