बैंकों की सोमवार से 3 दिन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल, सेवाओं पर असर पड़ेगा

27 Sep 2026 19:35:53
बैंक हड़ताल के लोगो का प्रतीकात्मक चित्र


- पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग को लेकर तीन दिवसीय हड़ताल पर रहेंगे बैंककर्मी

नई दिल्ली, 27 सितंबर (हि.स.)। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की यूनियनों की सोमवार से 3 दिवसीय देशव्यापी हड़ताल शुरू होगी, जिसके चलते चेक क्लीयरेंस, नकद निकासी और जमा सहित बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है। बैंक यूनियनों ने इस हड़ताल का आह्वान 5 दिवसीय कार्य सप्ताह और अन्य लंबित मांगों को लेकर किया है।

यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के आह्वान पर तीन दिन की बैंक हड़ताल 28 सितंबर को शुरू हो रही है, जो 30 सितंबर तक चलेगी। यह हड़ताल हफ़्ते में पांच दिन काम करने जैसी मांगों को लेकर की जा रही है। हड़ताल का मुख्य असर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, पुरानी पीढ़ी के निजी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) में देखने को मिल सकता है। बैंक यूनियनों की इस हड़ताल के दौरान डिजिटल बैंकिंग और अन्य ऑनलाइन सेवाओं के सामान्य रूप से चालू रहने की संभावना है। आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक जैसे निजी बैंकों की शाखाएं इन तीन दिनों के दौरान खुली रहेंगी।

सार्वजनिक क्षेत्र के ज्यादातर बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों ने अपने ग्राहकों को हड़ताल और उससे होने वाली संभावित असुविधा के बारे में पहले ही बता दिया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने ग्राहकों को जारी परामर्श में कहा कि बैंक शाखाओं और कार्यालयों में आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने की हर कोशिश की जाएगी, फिर भी हड़ताल के दौरान कुछ सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के सात संगठनों के शीर्ष निकाय यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। यूनियन नेताओं के अनुसार मुख्य श्रम आयुक्त के साथ हाल में हुई सुलह बैठकों के दौरान सरकार ने पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया।

इस बीच, वित्त मंत्रालय ने इस हफ्ते की शुरुआत में बैंक कर्मचारियों से हड़ताल का रास्ता न अपनाने और बातचीत के जरिए बाकी मांगों को सुलझाने की अपील की थी। मंत्रालय ने कहा था कि यूनियनों की ज्यादातर चिंताओं का पहले ही काफी हद तक समाधान किया जा चुका है। मंत्रालय ने यह भी कहा था कि प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को वापस लेने की मांग पर विस्तृत चर्चा के बाद इस महीने की शुरुआत में ही इसे स्थगित कर दिया गया था।

पांच दिवसीय बैंकिंग के अलावा यूनियनें कई अन्य मुद्दों के समाधान की भी मांग कर रही हैं। इनमें पेंशन लाभों को सुधारना, सभी पेंशनभोगियों के लिए एक समान महंगाई भत्ता (डीए) फॉर्मूला लागू करना और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत आने वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) में लौटने का विकल्प देना भी शामिल है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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