मप्र की डॉ नीलिमा सत्यम को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय सम्मान, मुख्यमंत्री डॉ यादव ने दी बधाई

27 Sep 2026 22:25:53
डॉ. नीलिमा सत्यम


भोपाल, 27 सितंबर (हि.स.)। आईआईटी इंदौर की प्रोफेसर डॉ. नीलिमा सत्यम को अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिलने जा रहा है। उनका चयन अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन के 2026 के पुरस्कार के लिए हुआ है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आईआईटी इंदौर में सिविल इंजीनियरिंग विभाग की डॉ. नीलिमा सत्यम को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मान 'अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन अवार्ड' मिलने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि अपने उत्कृष्ट शोध एवं योगदान से प्रो. नीलिमा सत्यम ने शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में विशेष पहचान बनाई है।

उल्लेखनीय है कि अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन अवार्ड पृथ्वी, अंतरिक्ष और पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान, अभूतपूर्व शोध, नवाचार और विज्ञान संचार के लिए दिया जाने वाले विश्व का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है।

नीलिमा सत्यम को देवेंद्र लाल मेडल

आईआईटी इंदौर की प्रोफेसर नीलिमा सत्यम को देवेंद्र लाल मेमोरियल मेडल के लिए चुना गया है। यह मेडल हर साल किसी युवा या मध्य करियर वैज्ञानिक को दिया जाता है। यह सम्मान पृथ्वी विज्ञान और अंतरिक्ष विज्ञान में उत्कृष्ट शोध के लिए मिलता है। नीलिमा सत्यम भू-तकनीकी इंजीनियरिंग और भूकंपीय जोखिम पर काम करती हैं। उन्होंने आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे पर भी गहन शोध किया है। इसके अलावा भू-जोखिम कम करने के तरीकों पर भी उनका काम अहम माना जाता है। मेडल के साथ उन्हें एजीयू की आजीवन सदस्यता भी मिलेगी। यह किसी भी वैज्ञानिक के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

आईआईटी-इंदौर की प्रोफेसर डॉ. नीलिमा सत्यम देवराकोंडा मूल रूप से आंध्र प्रदेश (चित्तूर जिला) की रहने वाली हैं। उन्होंने अपनी बी.टेक की डिग्री श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय तिरुपति (आंध्र प्रदेश) से पूरी की है। इसके बाद उन्होंने आईआईटी दिल्ली से अपनी एमटेक और पीएचडी की शिक्षा प्राप्त की। वह वर्तमान में आईआईटी इंदौर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में इंस्टीट्यूट चेयर प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं और इंदौर (मध्य प्रदेश) में रह रही हैं। आईआईटी इंदौर आने से पहले वे हैदराबाद के अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान में सहायक प्रोफेसर थीं। वहां वे भूकंप इंजीनियरिंग अनुसंधान केंद्र से जुड़ी थीं। उन्होंने टोक्यो विश्वविद्यालय, स्टटगार्ट विश्वविद्यालय और क्यूशू विश्वविद्यालय में विजिटिंग रिसर्चर के तौर पर भी काम किया है। यह अनुभव 2013 से 2023 के बीच का है।

प्रोफेसर डॉ. नीलिमा सत्यम के साथ ही भारतीय वैज्ञानिक रॉक्सी मैथ्यू कोल्ल को भी अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन के 2026 के पुरस्कारों के लिए चुना गया है। रॉक्सी को जलवायु संचार के क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा, जबकि प्रो. नीलिमा सत्यम को भूविज्ञान के क्षेत्र में शोध के लिए सम्मानित किया जाएगा। यह पुरस्कार समारोह दिसंबर में सैन फ्रांसिस्को में होगा। इस पुरस्कार के तहत विजेता को 25 हजार अमेरिकी डॉलर की राशि दी जाती है।

जलवायु वैज्ञानिक रॉक्सी मैथ्यू कोल्ल पुणे के भारतीय मौसम विज्ञान संस्थान में काम करते हैं। उन्हें पहले भी राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार (युवा) मिल चुका है। अब उन्हें एजीयू के पावेल एस. मोलचानोव क्लाइमेट कम्युनिकेशंस प्राइज के लिए चुना गया है। यह पुरस्कार हर साल किसी एक वैज्ञानिक को दिया जाता है। कोल्ल ने हिंद महासागर के बढ़ते तापमान पर गहराई से काम किया है। उन्होंने मानसून में हो रहे बदलावों को भी बारीकी से दर्ज किया है। उनके शोध में समुद्र की सतह के गर्म होने का जिक्र भी है। साथ ही चक्रवात और भारी बारिश के असर पर भी उन्होंने काम किया है।

गौरतलब है कि अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन (एजीयू) पृथ्वी और अंतरिक्ष विज्ञान को बढ़ावा देने वाली एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्था है। इसकी स्थापना वर्ष 1919 में अमेरिका में हुई थी। इसका मुख्यालय वाशिंगटन डीसी, अमेरिका में स्थित है। इसमें 130 से अधिक देशों के 60,000 से अधिक वैज्ञानिक, शोधकर्ता और छात्र जुड़े हुए हैं। यह संस्था पृथ्वी, वायुमंडल, महासागर, जल विज्ञान, अंतरिक्ष और ग्रह विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान कार्य करती है। यह संस्था दुनिया भर में हर साल वैज्ञानिक सम्मेलन आयोजित करती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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