मप्र के उज्जैन में सिहंस्थ के लिए सड़क चौड़ीकरण के जद में आई 636 साल पुरानी शाही मस्जिद, हटाने का विरोध

युगवार्ता    27-Sep-2026
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उज्जैन की शाही मस्जिद


- जमा हुए मुस्लिम समाज के लोग, ओवैसी बोले- ऐसे मस्जिदों को शहीद नहीं कर सकते

उज्जैन, 27 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ-2028 के लिए प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रही 636 साल पुरानी शाही मस्जिद को हटाने की तैयारी का मुस्लिम समाज ने विरोध शुरू कर दिया है। शनिवार रात से ही बड़ी संख्या में लोग मस्जिद के अंदर और बाहर एकत्रित हो गए और नारेबाजी की। रविवार दोपहर तक लोगों का विरोध जारी रहा।

दरअसल, महाकाल की नगरी उज्जैन में ‘सिंहस्थ 2028’ के तहत सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसकी जद में शाही मस्जिद भी आ रही है। मुस्लिम समाज से जुड़े लोगों ने इसे हटाने का विरोध शुरू कर दिया है। शनिवार रात से जुटा लोगों का हुजूम रविवार दोपहर तक विरोध प्रदर्शन करता रहा। इसे देखते हुए प्रशासन ने किसी भी हिंसा की संभावना से निपटने के लिए अतिरिक्त अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया है। मस्जिद के सामने बैरिकेड लगाए गए और पुलिस बल व आरएएफ की टुकड़ी तैनात की गई। इसमें करीब 600 से अधिक जवानों को मस्जिद और उसके आस-पास के इलाके में तैनात कर दिया गया है।

उज्जैन की शाही मस्जिद को हटाने को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष एवं हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी का बयान सामने आया है। जिसमें उन्होंने कहा कि आप इस तरीके से मस्जिदों को शहीद नहीं कर सकते। मैंने संसद में कहा था कि नए वक्फ अमेंडमेंट एक्ट के जरिए कलेक्टरों और सरकार को जो अधिकार दिए गए हैं, उनका मकसद मस्जिदों, दरगाहों, खानकाहों, कब्रिस्तानों और ईदगाहों को मुसलमानों से छीनना है। यह साबित भी हो रहा है। इस अमेंडमेंट एक्ट का मकसद साफ नजर आ रहा है।

मस्जिद को लेकर दोबारा हाईकोर्ट पहुंचा मुस्लिम समाज

सड़क चौड़ीकरण को लेकर मुस्लिम समाज पहले मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में याचिका लगा चुका है। करीब 17 दिन पहले उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने याचिका निरस्त कर दी थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए अब युगलपीठ में अपील प्रस्तुत की गई है। शुक्रवार को सुनवाई होना थी, लेकिन अदालत का समय समाप्त होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। अब सोमवार को मामले में सुनवाई होगी।

इधर, प्रशासन धार्मिक स्थलों को हटाने की कार्रवाई में ज्यादा समय देने के पक्ष में नहीं है, क्योंकि सिंहस्थ की तैयारियों के लिए अब ज्यादा समय नहीं बचा है। रविवार रात या सोमवार सुबह से धार्मिक स्थलों को हटाने की कार्रवाई शुरू हो सकती है।

शाही मस्जिद के इमाम मोहम्मद इब्राहिम ने कहा कि शहर में इससे पहले भी सड़क चौड़ीकरण हुआ है और धार्मिक स्थलों को छोड़कर चौड़ीकरण किया गया है। उन्होंने दावा किया कि शाही मस्जिद वर्ष 1390 में बनी है और शहर के प्राचीन धार्मिक स्थलों में शामिल है। इमाम ने कहा कि प्रशासन से यही कहना है कि धार्मिक स्थल को छोड़कर समाज हर तरह से सहयोग करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि मस्जिद का ढांचा ऐसा है कि अगर थोड़ा भी उससे छेड़छाड़ की गई तो पूरी इमारत नीचे आ सकती है। इमाम के मुताबिक, यह मस्जिद करीब 636 साल पुरानी है।

प्रशासन के अनुसार, सिंहस्थ-2028 में उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। गोपाल मंदिर मार्ग शहर के व्यस्त और संकरे रास्तों में शामिल है। सिंहस्थ के दौरान यातायात को सुचारू रखने और भीड़ का दबाव कम करने के लिए कंठाल से गोपाल मंदिर तक मार्ग का चौड़ीकरण जरूरी माना जा रहा है। नगर निगम का कहना है कि चौड़ीकरण की कार्रवाई मास्टर प्लान और निर्धारित नियमों के तहत की जा रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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