ब्रसेल्स, 29 सितंबर (हि.स.)। यूरोपीय संघ (ईयू) में नए देशों के संभावित प्रवेश से जुड़े जोखिमों को देखते हुए यूरोपीय आयोग ने कई नए सुरक्षा उपायों का प्रस्ताव रखा है। आयोग का उद्देश्य नए सदस्य देशों के शामिल होने के बाद लोकतांत्रिक संस्थाओं के कमजोर होने और ईयू के फैसलों में बार-बार रुकावट पैदा होने की आशंका को कम करना है।
मोंटेनेग्रो, अल्बानिया, यूक्रेन और मोल्दोवा की ईयू सदस्यता की कोशिशों में प्रगति के बीच आयोग विस्तार के नियमों और उसके प्रभावों की समीक्षा कर रहा है। आयोग के मसौदे में कहा गया है कि ईयू का विस्तार यूरोप को मजबूत करता है, लेकिन अधिक सदस्य होने से निर्णय लेने, प्रशासन, बुनियादी ढांचे और वित्तीय व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
आयोग एक ऐसे अस्थायी प्रावधान पर विचार कर रहा है, जिसके तहत नया सदस्य सीमित अवधि तक आम सहमति से लिए जाने वाले फैसलों का विरोध नहीं करने की प्रतिबद्धता जताए। एक अन्य प्रस्ताव के तहत सदस्य बनने के बाद कुछ समय तक मौजूदा सदस्य देश नए सदस्य के मतदान अधिकार समेत कुछ अधिकारों को निलंबित कर सकेंगे। इसके लिए 27 में से 15 देशों और ईयू की 65 प्रतिशत आबादी का समर्थन जरूरी हो सकता है।
मसौदे में कृषि और श्रमिकों की मुक्त आवाजाही जैसे क्षेत्रों में भी नए सदस्यों के लिए सीमित अवधि के सुरक्षा प्रावधान रखने की संभावना जताई गई है। आयोग ने प्रतिबंध जैसे मुद्दों पर योग्य बहुमत से फैसले लेने की व्यवस्था बढ़ाने की भी बात दोहराई है, हालांकि इसके साथ राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के उपाय जरूरी बताए गए हैं।
आयोग ने भविष्य के सदस्य देशों को औपचारिक सदस्यता से पहले ही रक्षा, ऊर्जा और परिवहन जैसे क्षेत्रों में ईयू के कार्यक्रमों से धीरे-धीरे जोड़ने की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित करने का भी प्रस्ताव दिया है। यह मसौदा अभी अंतिम नहीं है और इसमें बदलाव संभव है।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय