देश के ‘प्रगति-50’ शहरों में मध्य प्रदेश के तीन शहर इंदौर, भोपाल और उज्जैन भी शामिल

29 Sep 2026 23:59:53
केन्द्रीय मंत्री मनोहर लाल की उपस्थिति में ‘प्रगति-50’ शहरों में को लेकर आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग


- कचरा मुक्त एवं धूल मुक्त शहरों के निर्माण के साथ युवाओं और उद्योगों की सहभागिता से सर्कुलर इकोनॉमी को मिलेगा बढ़ावा

भोपाल, 29 सितंबर (हि.स.)। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत शहरी स्वच्छता, सैनिटेशन एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में देश के चयनित 50 शहरों को मॉडल शहर के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गई प्रगति-50 पहल में मध्य प्रदेश के तीन शहरों-इंदौर, भोपाल एवं उज्जैन का चयन किया गया है। चयनित शहरों में स्वच्छता, सैनिटेशन, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन तथा नागरिक सहभागिता के क्षेत्र में समयबद्ध एवं परिणाम आधारित कार्यों को गति दी जाएगी।

प्रगति-50 पहल के संबंध में मंगलवार को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मध्य प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ऑनलाइन शामिल हुए। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे सहित विभागीय एवं संबंधित नगरीय निकायों के अधिकारियों ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सहभागिता की। बैठक में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत नई पहलों, तकनीकी नवाचारों तथा प्रगति-50 शहरों में स्वच्छता के परिणामों को गति देने के लिए निगरानी एवं क्रियान्वयन व्यवस्था पर चर्चा हुई।

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत की संकल्पना के अनुरूप मध्य प्रदेश प्रगति-50 के लिए संकल्पित होकर कार्य करेगा। इंदौर, भोपाल और उज्जैन में विस्तृत कार्ययोजना बनाकर हम उत्कृष्ट कार्य कर प्रदेश और इन महानगरों की प्रतिष्ठा बढ़ाने का काम करेंगे। उज्जैन सिंहस्थ की दृष्टि से इन तीनों शहरों का समग्र विकास अति महत्वपूर्ण है। इस पहल से इन शहरों में स्टार्टअप और इंडस्ट्रियल सेक्टर के विस्तार में गति आएगी। युवा स्वच्छता के लीडर बन पाएंगे।”

उज्जैन में सिंहस्थ की दृष्टि से विशेष तैयारी

विजयवर्गीय ने कहा कि वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महापर्व की दृष्टि से स्वच्छता एवं सैनिटेशन अधोसंरचना को प्राथमिकता के आधार पर सुदृढ़ करने में इस पहल की बड़ी भूमिका होगी। घाटों, सार्वजनिक शौचालयों, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन तथा भीड़-आधारित स्वच्छता व्यवस्था को उन्नत किया जाएगा। क्षिप्रा नदी की स्वच्छता, उपयोगित जल प्रबंधन एवं पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन के लिए समन्वित कार्ययोजना तैयार की जाएगी। ज़ीरो वेस्ट ईवेंट और सर्कुलर सैनिटेशन मैनेजमेंट की अवधारणा को अपनाने की दिशा में प्रयास किया जाएगा।

मिशन मोड पर होगा काम, युवाओं की सहभागिता का लक्ष्य

बैठक में बताया गया कि इस पहल के अंतर्गत कचरा मुक्त और धूल मुक्त शहरों की अवधारणा को साकार करने के लिए मिशन मोड पर कार्य किया जाएगा। स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण, घर-घर कचरा संग्रहण, एमआरएफ, कम्पोस्टिंग एवं वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रसंस्करण को सुदृढ़ किया जाएगा। सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता, सौंदर्यीकरण एवं दर्शनीय स्वच्छता और सुंदरता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। वेस्ट-टू-वेल्थ और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा दिया जाएगा। युवाओं, स्टार्टअप्स एवं उद्योगों की स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन में सहभागिता बढ़ाई जाएगी। स्वच्छता क्षेत्र में नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित किया जाएगा।

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए भोपाल के लिए विशेष कार्ययोजना

वर्ष 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की दृष्टि से भोपाल को स्वच्छ, हरित एवं निवेश-अनुकूल महानगर के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, उपयोगित जल का पुनः उपयोग, सार्वजनिक स्वच्छता, सौंदर्यीकरण एवं दृश्य स्वच्छता को प्राथमिकता दी जाएगी। कचरा संभावित स्थलों के उन्मूलन और सार्वजनिक स्थलों के कायाकल्प पर विशेष जोर दिया जाएगा। वेस्ट-टू-वेल्थ, सर्कुलर इकोनॉमी तथा पीपीपी आधारित परियोजनाओं को प्रोत्साहन करना भी इस पहल में शामिल है। इसके अंतर्गत समयबद्ध क्रियान्वयन एवं परिणाम आधारित निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी।

प्रदेश में स्टार्टअप एवं नवाचार को प्रोत्साहन

स्वच्छता क्षेत्र में नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक चयनित स्टार्टअप को प्रारंभिक स्तर पर 20 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की पहल पर कार्य किया जाएगा। आईआईटी कानपुर की सहभागित व सहयोग के साथ स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन, पुनर्चक्रण, सर्कुलर इकोनॉमी एवं तकनीकी नवाचार से जुड़े नए उद्यमों को प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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