
भोपाल, 29 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों की मौत का मामला अब राजनीतिक रूप से भी तूल पकड़ता जा रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक अक्टूबर को बालाघाट पहुंचेंगे। प्रस्तावित दौरे में वे बैहर और बिरसा क्षेत्र के प्रभावित आदिवासी गांवों में जाएंगे और मृत बच्चों के परिजनों से मुलाकात करेंगे।
राहुल गांधी का एक माह के भीतर मध्य प्रदेश का यह दूसरा दौरा होगा। इससे पहले 19 सितंबर को वे इंदौर पहुंचे थे, जहां उन्होंने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। बालाघाट में बच्चों की मौत के मामले को लेकर राहुल गांधी पहले भी राज्य सरकार पर सवाल उठा चुके हैं। सितंबर की शुरुआत में उन्होंने 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत का उल्लेख करते हुए बीमारी, पोषण, साफ पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सरकार से जांच तथा राहत की मांग की थी।
मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मंगलवार को सोशल मीडिया एक्स पर एक वीडियो शेयर कर राहुल गांधी के बालाघाट दौरे की जानकारी साझा की है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी प्रभावित इलाकों में जाकर मृत बच्चों के परिवारों से मिलेंगे। वे परिवारों से उनकी समस्याओं और सरकारी योजनाओं की वास्तविक स्थिति के बारे में जानकारी लेंगे।
सिंघार के मुताबिक, प्रभावित आदिवासी परिवारों तक पोषण, दलिया, मच्छरदानी और टीकाकरण जैसी जरूरी सुविधाएं पहुंचने में कमी रही है। उन्होंने मृत बच्चों के परिवारों को आर्थिक सहायता दिए जाने के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उनका कहना है कि केवल आर्थिक मदद देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है कि योजनाओं का लाभ प्रत्येक जरूरतमंद परिवार तक पहुंचे। सिंघार ने स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी तय किए जाने और मुख्यमंत्री की ओर से इस मामले में स्पष्ट जवाब देने की मांग भी की है।
गौरतलब है कि बालाघाट जिले में बिरसा विकासखंड के बैगा आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों की मौत का सिलसिला जून 2026 से सामने आया था। यहां पहली दर्ज मौत 16 जून 2026 को बोंदारी गांव में 16 वर्षीय रूपलाल धुर्वे की हुई थी। इसके बाद 26 जून को कोहनीमोड़टोला की 14 वर्षीय लमनिन धुर्वे और 27 जून को साहिल धुर्वे की मौत हुई। इसके बाद बोंदारी, कुंडेकसा, कोरका और आसपास के गांवों में बच्चों की मौतों का सिलसिला बढ़ता गया।
मामला शुरुआत में स्थानीय स्तर तक सीमित रहा। प्रभावित गांवों में लगातार बच्चों की मौत के बावजूद इसकी व्यापक जानकारी बाद में सामने आई। अगस्त में स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और मीडिया रिपोर्टों के जरिए मामला सार्वजनिक हुआ। इसके बाद 22 जुलाई को अडोरी पंचायत के सरपंच ने बोंदारी में तीन बच्चों की मौत की जानकारी तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी को दी थी। तत्पश्चात 12 अगस्त को जिला प्रशासन ने प्रभावित गांवों में बीमारी के प्रकोप को लेकर पत्र जारी किया।
मुख्यमंत्री भी कर चुके हैं प्रभावित क्षेत्रों का दौरा
बालाघाट के प्रभावित आदिवासी इलाकों में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी 29 अगस्त को पहुंचे थे। उस समय सरकार की ओर से आठ बच्चों की मौत की पुष्टि की गई थी, जबकि स्थानीय स्तर पर मृतकों की संख्या इससे अधिक बताई जा रही थी। मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी।
इसके बाद मौतों का सरकारी आंकड़ा बढ़ता गया। केंद्र और राज्य की स्वास्थ्य टीमों की जांच के साथ प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने सितंबर में स्थिति की समीक्षा करते हुए दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने, बच्चों के पूर्ण टीकाकरण और उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। सरकार ने जिले में नए चिकित्सा अधिकारियों की तैनाती और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए राशि स्वीकृत करने की जानकारी भी दी है।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संयोजक अभिजीत दिपके ने भी 12 सितंबर को बालाघाट के प्रभावित गांवों का दौरा किया था। उन्होंने अडोरी, कोरका और बोंदारी में मृत बच्चों के परिजनों से मुलाकात की थी। अब राहुल गांधी के एक अक्टूबर के प्रस्तावित दौरे के बाद बालाघाट में बच्चों की मौत का यह मामला एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में रहेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर