जैव प्रौद्योगिकी निवेश को मिलेगा बढ़ावा, बायो निवेश प्लेटफॉर्म किया गया लॉन्च

युगवार्ता    03-Sep-2026
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केन्द्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह


नई दिल्ली, 03 सितंबर (हि.स.)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को स्टार्टअप्स और निवेशकों के साथ संयुक्त राउंडटेबल बैठक की। इस दौरान उन्होंने बायो निवेश नामक रणनीतिक प्लेटफॉर्म लॉन्च किया। इसका उद्देश्य जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र के नवाचारों और निवेश समुदाय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा निजी पूंजी के प्रवाह को बढ़ावा देकर तकनीकों के व्यावसायीकरण और विस्तार को गति देना है।

इस मौके पर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि निवेश के बिना नवाचार अधूरा है और नवाचार के बिना निवेश टिकाऊ नहीं हो सकता। इसलिए भारत के जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र की वृद्धि के लिए नवप्रवर्तकों, निवेशकों, उद्योग और सरकार के बीच करीबी सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि बायो-निवेश शोध और उद्यमिता से निकलने वाले विचारों को उद्योग, बड़े पैमाने पर उत्पादन और बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

संवाद में मंत्री ने जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में ‘पांच साल में बिग फाइव’ जैसी रणनीति की संभावनाओं पर विचार करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि कुछ बड़ी एंकर कंपनियों के निर्माण के लिए केंद्रित संसाधन उपलब्ध कराने से ऐसा मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार हो सकता है, जिसके सहारे अन्य स्टार्टअप भी आगे बढ़ सकें।

उन्होंने कहा कि एक क्षेत्र में विकसित होने वाले विचारों की दूसरे क्षेत्रों में उपयोगिता की भी जांच की जानी चाहिए, जहां ऐसा करना संभव हो।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी अगली औद्योगिक क्रांति को गति देने वाली प्रमुख तकनीकों में शामिल हो सकती है। भारत को इस बार देर से प्रवेश करने की गलती नहीं दोहरानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आईटी क्रांति के दौरान भारत करीब एक दशक पीछे रह गया था, लेकिन अब जैव प्रौद्योगिकी आधारित तकनीकी विकास की अगली लहर में देश को शुरुआती अवसरों का लाभ उठाना होगा।

मंत्री ने कहा कि लक्ष्य ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाना होना चाहिए, जहां विज्ञान की मुलाकात पूंजी से, नवाचार की उद्योग से और शोध की बाजार से हो। सरकार शुरुआती जोखिम कम करने और अनुकूल परिस्थितियां बनाने में मदद कर सकती है, लेकिन दीर्घकालिक विकास और तकनीकों को बड़े पैमाने पर बाजार तक पहुंचाने में निजी पूंजी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी खोलने से निवेशकों और उद्यमियों में पैदा हुए उत्साह का उल्लेख किया। उन्होंने परमाणु क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोलने से भी निवेश रुचि बढ़ने की बात कही। ये उदाहरण बताते हैं कि सही नीतिगत फैसले उन क्षेत्रों में भी निवेश की नई संभावनाएं पैदा कर सकते हैं, जहां पहले निजी भागीदारी सीमित थी।

निवेशकों से तकनीक और बाजार क्षमता पर ध्यान देने की अपील

मंत्री ने जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कॉरपोरेट जगत की भागीदारी बढ़ाने और दोनों पक्षों की सोच में बदलाव की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी में विकास चक्र लंबा होता है, नियामकीय प्रक्रियाएं चुनौतीपूर्ण होती हैं और पर्याप्त पूंजी की जरूरत पड़ती है। हालांकि सफल नवाचार स्वास्थ्य, समाज और अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक और व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं।

उन्होंने निवेशकों से केवल तत्काल फंडिंग राउंड के बजाय तकनीक, बौद्धिक संपदा, विकास की राह, बाजार की संभावनाओं और भारत से वैश्विक स्तर की कंपनियां बनाने की क्षमता पर ध्यान देने का आग्रह किया।

साथ ही, उन्होंने नवप्रवर्तकों से निवेशकों के साथ शुरुआती चरण में ही जुड़ने की अपील की।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने अनुसंधान, विकास एवं नवाचार फंड का भी उल्लेख किया, जिसका कुल प्रावधान 1 लाख करोड़ रुपये है। इसके तहत बाइरैक को जैव प्रौद्योगिकी और संबद्ध क्षेत्रों के लिए सेकेंड-लेवल फंड मैनेजर बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था तकनीक विकसित करने वालों, स्टार्टअप्स और रणनीतिक जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों के लिए दीर्घकालिक और धैर्यपूर्ण पूंजी उपलब्ध कराने में मदद करेगी। खासतौर पर तकनीक के ट्रांसलेशन, स्केल-अप और नवाचार आधारित विनिर्माण के लिए यह महत्वपूर्ण होगी।

बायो निवेश के पहले संस्करण में 20 उच्च क्षमता वाले जैव प्रौद्योगिकी और डीप-टेक स्टार्टअप्स तथा करीब 50 चुनिंदा निवेशकों ने हिस्सा लिया। इस प्लेटफॉर्म को सामान्य स्टार्टअप पिचिंग या निवेशक-कनेक्ट कार्यक्रम से आगे ले जाने की योजना है।

इसके तहत नवप्रवर्तकों को निवेशकों की प्राथमिकताओं और निवेश प्रक्रिया को समझने का अवसर मिलेगा, जबकि निवेशक जैव प्रौद्योगिकी की वैज्ञानिक, नियामकीय और विकास संबंधी जरूरतों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।

पहले सत्र में सीधे स्टार्टअप-निवेशक संवाद का आयोजन हुआ। स्टार्टअप्स का चयन उनके नवाचार, विकास के स्तर, बाजार क्षमता, विस्तार की संभावना और नियामकीय तैयारी के आधार पर किया गया। दूसरे सत्र में मंत्री ने निवेशकों और स्टार्टअप्स के साथ पूंजी की उपलब्धता, व्यावसायीकरण, स्केल-अप और नवाचार आधारित विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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