
जोधपुर, 30 सितंबर (हि.स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जोधपुर की परिवहन प्रणाली एवं यातायात मॉडलिंग प्रयोगशाला में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और आंकड़ा विश्लेषण की मदद से भारतीय यातायात व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और कुशल बनाने की दिशा में शोध किया जा रहा है। शोध का उद्देश्य सड़क पर जाम दिखाई देने से पहले ही उसके बनने की संभावना का अनुमान लगाने और दुर्घटना से पहले उत्पन्न होने वाली जोखिमपूर्ण परिस्थितियों की पहचान करना है।
सिविल एवं आधारभूत संरचना अभियांत्रिकी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर और प्रयोगशाला प्रमुख डॉ. रंजू मोहन के नेतृत्व में चल रहे इस शोध में परिवहन अभियांत्रिकी, गणित, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, व्यवहार विज्ञान और आंकड़ा विश्लेषण को एक साथ जोड़ा गया है। शोधकर्ता सड़क, वाहन, यातायात, तकनीक और मानव व्यवहार के बीच होने वाली अंत:क्रियाओं का अध्ययन कर रहे हैं। इसके लिए गणितीय और संगणकीय मॉडल विकसित किए जा रहे हैं, ताकि यह समझा जा सके कि किन परिस्थितियों में यातायात जाम बनता है और क्या जाम बनने से पहले उसका अनुमान लगाया जा सकता है।
भारतीय सड़कों पर कार, बस, ट्रक और दोपहिया जैसे विभिन्न प्रकार के वाहन एक साथ चलते हैं। कई स्थानों पर लेन अनुशासन और यातायात व्यवहार भी अलग-अलग होता है। ऐसे में यातायात के बदलते स्वरूप का अध्ययन चुनौतीपूर्ण है। प्रयोगशाला के शोध से भविष्य में बुद्धिमान परिवहन प्रणालियों, डिजिटल प्रतिरूप और बेहतर यातायात प्रबंधन रणनीतियों के विकास के लिए वैज्ञानिक आधार तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. रंजू मोहन के अनुसार, परिवहन व्यवस्था केवल सड़क और वाहनों तक सीमित नहीं है। इसमें लोगों का व्यवहार, आधारभूत ढांचा, तकनीक और आंकड़े भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शोध का लक्ष्य इन सभी के बीच होने वाली अंत:क्रियाओं को वैज्ञानिक तरीके से समझना और ऐसी परिवहन व्यवस्था विकसित करने में योगदान देना है, जो सुरक्षित, कुशल और लोगों की जरूरतों के अनुरूप हो।
प्रयोगशाला में आधुनिक वाहन चालन अनुकारक के जरिए नियंत्रित वातावरण में भारतीय सड़कों और विभिन्न यातायात परिस्थितियों का अनुभव तैयार किया जा रहा है। इसके माध्यम से यह अध्ययन किया जा रहा है कि अलग-अलग सड़क, यातायात और पर्यावरणीय परिस्थितियों में चालक किस तरह प्रतिक्रिया करते हैं। इससे वास्तविक सड़क पर किसी व्यक्ति को जोखिम में डाले बिना चालक के व्यवहार का अध्ययन संभव हो रहा है।
जापान के सहयोग से चल रही जेएसटी लोटस परियोजना के तहत सड़क की भौतिक परिस्थितियों और चालक के व्यवहार के बीच संबंधों का भी अध्ययन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भविष्य में अधिक सुरक्षित और आरामदायक सड़क तथा परिवहन अवसंरचना के विकास में मदद करना है।
प्रयोगशाला यात्रियों के अनुभव और उनके यात्रा व्यवहार का भी अध्ययन कर रही है। शोधकर्ता यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि लोग एक परिवहन साधन को दूसरे की तुलना में क्यों चुनते हैं और यात्रा का अनुभव भविष्य में उनके परिवहन विकल्पों को किस तरह प्रभावित करता है। इन अध्ययनों से अधिक सुविधाजनक, समावेशी और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
भारतीय यातायात की वास्तविक परिस्थितियों को समझने के लिए प्रयोगशाला आईडीएस जोधा नामक व्यापक परिवहन आंकड़ा समूह विकसित कर रही है। इसमें अलग-अलग यातायात परिस्थितियों से बड़े स्तर पर क्षेत्रीय आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं। एआई की तकनीकों, विशेषकर ग्राफ न्यूरल नेटवर्क, के माध्यम से सड़क पर मौजूद विभिन्न उपयोगकर्ताओं के बीच होने वाली जटिल अंत:क्रियाओं का विश्लेषण किया जा रहा है।
दुर्घटना से पहले जोखिम की पहचान पर जोर
शोध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सक्रिय सड़क सुरक्षा पर केंद्रित है। यातायात प्रवाह मॉडल, वाहन चालन अनुकरण, चालक व्यवहार अध्ययन और वास्तविक सड़कों से प्राप्त यातायात आंकड़ों को एक साथ जोड़कर संभावित जोखिमों की पहले पहचान करने के तरीके विकसित किए जा रहे हैं। शोधकर्ताओं का उद्देश्य ऐसे वैज्ञानिक समाधान तैयार करना है, जिनसे सड़क डिजाइन को अधिक सुरक्षित बनाने, यातायात प्रबंधन को बेहतर करने और परिवहन नीतियों को वास्तविक आंकड़ों एवं वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित करने में मदद मिले। आईआईटी जोधपुर का यह शोध भविष्य में सुरक्षित, स्मार्ट, टिकाऊ और लोगों को केंद्र में रखने वाली परिवहन व्यवस्था के विकास में उपयोगी हो सकता है।------------
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश