गुड गवर्नेंस का मतलब योजनाओं की आखिरी तबके तक पहुंच: राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा

30 Sep 2026 22:00:53

मुंबई, 30 सितंबर (हि.स.)। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने बुधवार को कहा कि गुड गवर्नेंस का मूल उद्देश्य सरकारी फैसलों, योजनाओं और सेवाओं का समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचना और उसका सशक्तीकरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत-2047’ केवल आर्थिक प्रगति का लक्ष्य नहीं, बल्कि अपनी सभ्यता और संस्कृति के साथ खुशहाल, सक्षम, समावेशी, तकनीकी रूप से अग्रणी और आत्मविश्वासी भारत का विजन है।

राज्यपाल मुंबई के ताज महल पैलेस में पांचजन्य की ओर से आयोजित ‘सुशासन संवाद- मुंबई संकल्प’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के सामने ‘विकसित भारत-2047’ का लक्ष्य रखा है, जिसका केंद्र विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। यह विचार पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘अंत्योदय’ दर्शन में भी दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचें, उसे मजबूत बनाएं और उसके जीवन स्तर में सुधार लाएं, यही सुशासन की वास्तविक कसौटी है। उन्होंने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ को समावेशी विकास का मंत्र बताते हुए कहा कि ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे संतु निरामया:’ की भावना भारतीय चिंतन की मूल विशेषता रही है। सरकार और समाज के मिलकर काम करने से ही विकास को व्यापक और टिकाऊ बनाया जा सकता है।

राज्यपाल ने स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को सामाजिक बदलाव का माध्यम बताते हुए त्रिपुरा में मंत्री और उपमुख्यमंत्री के रूप में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में बैंक स्वयं सहायता समूहों को ऋण देने को लेकर आशंकित थे। सरकार की गारंटी के बाद महिला समूहों को ऋण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज हुई। उन्होंने कहा कि महिलाओं और आम नागरिकों पर भरोसा किया जाए तो वह भरोसा विकास के रूप में वापस मिलता है।

उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर सुशासन पर संवाद का अवसर देने के लिए पांचजन्य को बधाई दी। उन्होंने कहा कि डिजिटल दौर में भी छपे हुए शब्दों की विश्वसनीयता और महत्व कायम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘मुंबई संकल्प’ से निकले विचार सुशासन और देश के विकास के लिए नए रास्ते और प्रेरणा देंगे।

पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर ने कहा कि पांचजन्य की यह पहल समाज के सवालों, जिज्ञासाओं, गलतफहमियों और असलियत को एक मेडिकल और कंस्ट्रक्टिव बातचीत के ज़रिए जानने की एक कोशिश है। उन्होंने बताया कि अलग-अलग सेशन में महाराष्ट्र का समाधान, छत्रपति शिवाजी महाराज का सिंबॉलिक महत्व, समाज के सामने आने वाली चुनौतियाँ, सिनेमा, बढ़ते भारत की आर्थिक तरक्की, स्टॉक मार्केट, महिलाओं और युवाओं के लिए एंटरप्रेन्योरशिप के मौके और ओटीटी मीडिया से जुड़ी सामाजिक चिंताओं पर चर्चा हुई। उन्होंने यह भी कहा कि इस पहल का मकसद बातचीत के ज़रिए तालमेल का पुल बनाना है। भारत प्रकाशन के मैनेजिंग डायरेक्टर अरुण कुमार गोयल ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

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