
एशियाई खेलों में कंपाउंड स्पर्धाओं में स्वर्णिम हैट्रिक
नागोया, 30 सितंबर (हि.स.)। जापान के आइची-नागोया में भारतीय राष्ट्रगान की गूंज के बीच जब भारतीय तीरंदाजों ने एशियाई खेल 2026 में कंपाउंड स्पर्धाओं के तीनों स्वर्ण पदक अपने नाम किए, उस ऐतिहासिक सफलता के पीछे महीनों की कठिन तैयारी, अलग-अलग मौसम में प्रशिक्षण और मुकाबले जैसी परिस्थितियों में मानसिक अभ्यास की अहम भूमिका रही। इस स्वर्णिम अभियान के केंद्र में रहे महाराष्ट्र के सातारा के 25 वर्षीय साहिल राजेश जाधव, जिन्होंने बुधवार को दो स्वर्ण पदक जीते और लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के मिश्रित कंपाउंड टीम वर्ग में भारत के लिए कोटा भी हासिल किया।
भारतीय पुरुष कंपाउंड टीम में साहिल राजेश जाधव, कुशल दलाल और गणेश मणि रत्नम थिरुमुरु ने चीन को 238-237 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। इससे कुछ ही समय पहले साहिल ने चिकिता तनीपार्थी के साथ मिलकर मिश्रित टीम स्पर्धा में दक्षिण कोरिया को शूटऑफ में हराकर स्वर्ण पदक जीता था।
इससे पहले दिन में ज्योति सुरेखा वेन्नम, चिकिता तनीपार्थी और पृथिका प्रदीप की भारतीय महिला कंपाउंड टीम ने चीन को 238-234 से हराकर स्वर्ण पदक जीता था। भारतीय टीम का यह स्कोर विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करने वाला रहा। इस तरह भारत ने एशियाई खेलों में कंपाउंड स्पर्धाओं के तीनों स्वर्ण पदक अपने नाम किए।
इस अभूतपूर्व सफलता के पीछे भारतीय खेल प्राधिकरण के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों कोलकाता और सोनीपत में की गई सुनियोजित तैयारी रही। सोनीपत में मुकाबले जैसी परिस्थितियों में सिमुलेशन अभ्यास ने तीरंदाजों को मानसिक रूप से तैयार किया, जबकि भारत में अलग-अलग मौसम में प्रशिक्षण और जापान में अनुकूलन शिविर ने खिलाड़ियों को प्रतियोगिता की परिस्थितियों के लिए तैयार किया।
साहिल के कोच हरेश कुमार ने पिछले कुछ महीनों की तैयारी के बारे में बताया कि टीम ने अलग-अलग मौसम में प्रशिक्षण लिया। उन्होंने साई मीडिया से बातचीत में कहा, हमने हर तरह के मौसम में प्रशिक्षण लिया है। हमने हिमाचल प्रदेश के शिलारू में ठंड और बारिश की परिस्थितियों में अभ्यास किया। इसके बाद हमने साई, सोनीपत में प्रशिक्षण लिया, जहां बेहद गर्मी थी। हम एशियाई खेलों से करीब 10-15 दिन पहले जापान पहुंचे और वहां बेहद तेज हवाओं की परिस्थितियों में प्रशिक्षण लिया। यह सब साहिल की मेहनत का नतीजा है कि वह अपनी कड़ी मेहनत को स्वर्ण पदकों में बदलने में सफल रहा।
दो स्वर्ण पदक जीतने के बाद साहिल ने अपनी उपलब्धि पर खुशी जताई, लेकिन साथ ही भविष्य की चुनौतियों को लेकर भी स्पष्टता दिखाई। उन्होंने साई मीडिया से वीडियो कॉल पर कहा, ठीक है। मैं खुश हूं कि मैंने दो एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक जीते और अपने देश तथा माता-पिता को गौरवान्वित किया। लेकिन अभी बहुत कुछ हासिल करना बाकी है।
उन्होंने आगे कहा, मैं खुश हूं कि मैं आज अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में सफल रहा और अगले ओलंपिक के लिए कोटा भी हासिल किया।
कोलकाता स्थित साई राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में प्रशिक्षण लेने वाले साहिल ने कहा कि जापान रवाना होने से पहले उन्हें अपने प्रदर्शन पर भरोसा था। उन्होंने कहा, हर खिलाड़ी स्वर्ण पदक जीतना और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहता है। मुझे विश्वास था कि मेरे अंदर स्वर्ण जीतने की क्षमता है। इसी वजह से मैंने पिछले कई महीनों में अभ्यास के दौरान कड़ी मेहनत की। मुझे पता था कि मैं कुछ विशेष कर सकता हूं।
साहिल के प्रदर्शन से उनके कोच हरेश कुमार भी बेहद खुश नजर आए। उन्होंने कहा कि उनके शिष्य ने एशियाई खेलों से पहले अभ्यास किए गए सभी रणनीतिक पहलुओं को मुकाबले में सही तरीके से लागू किया।
हरेश कुमार ने कहा, मैं उसके सभी शॉट्स से खुश हूं, क्योंकि साहिल उन सभी रणनीतियों को पूरी तरह से लागू करने में सफल रहा, जिनका हमने एशियाई खेलों से पहले अभ्यास किया था। एक कोच के तौर पर साहिल ने मुझे बेहद गर्व महसूस कराया है।
उन्होंने आगे कहा, साहिल ने अभ्यास के दौरान कड़ी मेहनत की थी। यही वजह है कि वह अपने पसीने और मेहनत को स्वर्ण पदकों में बदलने में सफल रहा।
साहिल के दो स्वर्ण पदकों और मिश्रित टीम वर्ग में ओलंपिक कोटा हासिल करने के साथ भारतीय कंपाउंड तीरंदाजी के लिए आइची-नागोया एशियाई खेलों का दिन ऐतिहासिक बन गया। अलग-अलग मौसम में अभ्यास, जापान में अनुकूलन और मुकाबले जैसी परिस्थितियों में सिमुलेशन ने भारतीय तीरंदाजों को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे