यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल होगी असम की अहोम सभ्यता, भारत ने किया नामांकन

05 Sep 2026 09:44:53
The image shared by Assam CM Dr Himanta Biswa Sarma.


गुवाहाटी, 05 सितंबर (हि.स.)। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने शनिवार को कहा कि अहोम राजवंश की ऐतिहासिक राजधानी रंगपुर-शिवसागर को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया गया है।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि भारत की ओर से बीते 19 जून, 2026 को पेरिस स्थित यूनेस्को में भारत के स्थायी प्रतिनिधिमंडल ने रंगपुर-शिवसागर एन्सेम्बल को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा देने के लिए औपचारिक रूप से नामांकन प्रस्तुत किया। यह नामांकन यूनेस्को के मानदंड (iii) और (iv) के तहत किया गया है।

अहोम राजवंश ने ब्रह्मपुत्र घाटी पर करीब छह शताब्दियों तक लगातार शासन किया था। रंगपुर-शिवसागर परिसर में अहोम काल की उत्कृष्ट स्थापत्य और इंजीनियरिंग विरासत मौजूद है, जिसमें रंगघर, कारेंगघर, ऐतिहासिक मंदिर, तालाब और अन्य महत्वपूर्ण संरचनाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, रंगघर एशिया के सबसे पुराने जीवित एम्फीथिएटरों में से एक है।

डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि यह पहल अहोम सभ्यता के गौरवशाली इतिहास को विश्व मंच पर और अधिक प्रमुखता से स्थापित करेगी। वर्ष 2024 में चराइदेव के मैदाम को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद यह कदम अहोम विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उन्होंने कहा कि चराइदेव अहोम राजवंश की स्मृतियों को संजोए हुए है, जबकि शिवसागर उनके शासन की गौरवगाथा को दर्शाता है। दोनों स्थल मिलकर असम के अहोम इतिहास की समृद्ध कहानी को पूर्ण करते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने असम की विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति राज्य की जनता की ओर से आभार व्यक्त किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

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