2013 में दुनिया भारत की पॉलिसी पैरालिसिस की चर्चा करती थी, आज पॉलिसी डायनामिज्म की हो रही चर्चा : पीएम मोदी

05 Sep 2026 22:01:53
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए


नई दिल्ली, 05 सितंबर (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि एक समय दुनिया भारत में ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ की चर्चा करती थी, लेकिन आज वही दुनिया भारत के ‘पॉलिसी डायनामिज्म’ की चर्चा कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में है और देश में नीतियों तथा फैसलों को लागू करने की गति को दुनिया देख और समझ रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2013 में जब वह एसआरसीसी आए थे, तब उन्होंने देश के सामने सकारात्मक दृष्टिकोण और भविष्य का विजन रखा था। उस समय देश में निराशा का माहौल था। उन्होंने गिलास का उदाहरण देते हुए कहा था कि कुछ लोग उसे आधा भरा और कुछ आधा खाली देखते हैं, जबकि वह गिलास को पूरी तरह भरा हुआ देखते हैं—आधा पानी और आधा हवा। उन्होंने कहा कि उस समय उनका यही विश्वास था और वे आज भी उन्हीं विचारों और सपनों के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

मोदी ने 2013 के अपने भाषण को याद करते हुए कहा कि उस समय वह गुजरात के मुख्यमंत्री होने के साथ देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी के सदस्य भी थे। लोगों को उम्मीद थी कि वह तत्कालीन केंद्र सरकार पर लंबा हमला करेंगे और आलोचनाओं की बौछार करेंगे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा, “मैंने एक विजन प्रस्तुत किया था। मैंने सकारात्मक बातों पर जोर दिया था।” देश के लिए समर्पित होकर काम करने की भावना को उन्होंने उसी मंच से शब्दों का रूप दिया था।

प्रधानमंत्री ने उस दौर की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि 2013 में अखबारों की सुर्खियों में नियंत्रण रेखा पर भारतीय सैनिकों की हत्या, भारत की विकास दर के अनुमान में कटौती, रिकॉर्ड चालू खाता घाटा, करीब 10 प्रतिशत महंगाई और आर्थिक सुस्ती जैसी खबरें प्रमुख थीं। उन्होंने कहा कि घोटाले चरम पर थे, भ्रष्टाचारी बेखौफ घूमते थे, अर्थव्यवस्था बदहाल थी और चारों तरफ ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ की चर्चा थी। दुनिया भारत को ‘फ्रैजाइल फाइव’ देशों में गिन रही थी और आतंकवाद तथा पाकिस्तान की चुनौती भी गंभीर थी।

मोदी ने कहा कि आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं। आतंकवाद फैलाने वाले पस्त पड़े हैं और पाकिस्तान की ओर से नापाक हरकत होने पर भारतीय सेनाएं जवाब देने में सक्षम हैं। जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर तक शांति बढ़ी है और माओवादी आतंक तथा नक्सलवाद की कमर तोड़ी गई है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में 7.8 प्रतिशत तिमाही आर्थिक वृद्धि और जापानी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी द्वारा भारत की रेटिंग में सुधार जैसी सकारात्मक खबरें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध और व्यापार संबंधी चुनौतियों के बावजूद इतनी तेज वृद्धि भारत के सामर्थ्य को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ लोग आज भी हर उपलब्धि को “आधा खाली गिलास” की दृष्टि से देखते हैं। उन्होंने कहा कि 2013 की तुलना में भारत आर्थिक और सामाजिक रूप से कहीं अधिक सुरक्षित है, लेकिन देश की प्रगति देखकर कुछ लोगों की बेचैनी और बौखलाहट बढ़ रही है।

उन्होंने रेलवे विद्युतीकरण को नीति-निर्णय की गति का उदाहरण बताया। मोदी ने कहा कि भारत की पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन 1925 में चली थी और एसआरसीसी की स्थापना 1926 में हुई थी। इसके बावजूद 2014 तक 90 वर्षों में देश की 30 प्रतिशत से भी कम रेलवे लाइनों का विद्युतीकरण हुआ था। पिछले 12 वर्षों में रेलवे विद्युतीकरण लगभग 100 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2013 में उन्होंने ‘मेड इन इंडिया’ पर जोर दिया था, जिसे उस समय कुछ लोगों ने समझा नहीं और आज भी कुछ लोग इसका मजाक उड़ाते हैं। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के बड़े ब्रांड भारत को अपना उत्पादन केंद्र बना रहे हैं और मेड इन इंडिया स्मार्टफोन दुनिया के कोने-कोने में पहुंच रहे हैं। 2014 में भारत बड़ी मात्रा में मोबाइल फोन आयात करता था, जबकि आज देश ढाई लाख करोड़ रुपये से अधिक के मोबाइल फोन निर्यात कर रहा है।

रक्षा उत्पादन का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि पहले भारतीय सेनाओं के लिए अधिकांश सामान विदेश से खरीदा जाता था। सरकार ने सेनाओं के साथ मिलकर जरूरतों की सूची तैयार की और भारतीय कंपनियों को उनका निर्माण करने के लिए प्रोत्साहित किया। आज देश का रक्षा उत्पादन सर्वकालिक ऊंचाई पर है और करीब दो लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन हो रहा है। 2013-14 में करीब 600-700 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात होता था, जो अब लगभग 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में करीब 40 देशों के साथ व्यापार और मुक्त व्यापार समझौते हुए हैं। इससे नए बाजार खुल रहे हैं और भारतीय वस्तुओं तथा सेवाओं पर शुल्क कम हो रहे हैं, जिससे युवाओं के लिए अवसरों का नया आकाश तैयार हो रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन होगा और वह दिन भी आएगा जब भारत ऐसे ओलंपिक का आयोजन करेगा कि पूरी दुनिया देखती रह जाएगी। उन्होंने कहा कि ये केवल बातें नहीं, बल्कि संकल्प हैं और इन्हें सिद्धि में बदलने के लिए देश में काम हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने एसआरसीसी के शताब्दी समारोह को ऐतिहासिक अवसर बताते हुए संस्थापक सर श्रीराम को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि दरियागंज के छोटे से स्थान से शुरू हुआ यह संस्थान आज विशाल वृक्ष बन चुका है। एसआरसीसी ने सौ वर्षों में पीढ़ियों को गढ़ा और उन्हें उज्ज्वल भविष्य से जोड़ा है। उन्होंने कॉलेज के पूर्व छात्रों को “ओजी” बताते हुए कहा कि उन्होंने देश-दुनिया में संस्थान का नाम रोशन किया। उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली को भी याद किया और कहा कि उनके साथ जब भी मुलाकात होती थी, वह एसआरसीसी की कोई न कोई घटना जरूर सुनाते थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस संस्थान से कलाकार, नेता, वकील और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने वाली अनेक हस्तियां निकली हैं।

मोदी ने युवाओं से 2013 और आज के भारत की तुलना करने तथा देश की क्षमताओं पर विश्वास रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “मुझे देश पर विश्वास है, देश की क्षमताओं पर विश्वास है और देश के युवाओं पर विश्वास है।” इसी विश्वास के आधार पर उन्होंने ‘विकसित भारत’ का संकल्प दोहराते हुए कहा कि 140 करोड़ भारतीय मिलकर देश को विकसित बनाएंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

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