
उज्जैन, 06 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर की भव्य राजसी सवारी इस बार रेडियो प्रसारण के माध्यम से देश-दुनिया के श्रद्धालुओं तक विशेष अंदाज में पहुंचेगी। आकाशवाणी उज्जैन द्वारा सोमवार, 07 सितंबर को दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक लगातार 8 घंटे बाबा महाकाल की राजसी सवारी का विशेष सजीव प्रसारण किया जाएगा। यह प्रसारण मध्य प्रदेश के सभी आकाशवाणी केंद्रों से एक साथ प्रसारित होगा।
आकाशवाणी उज्जैन के कार्यक्रम अधिकारी ब्रह्मप्रकाश चतुर्वेदी ने रविवार को जानकारी देते हुए बताया कि रेडियो प्रसारण के इतिहास में गैर-खेल गतिविधियों के क्षेत्र में इतनी लंबी अवधि तक लगातार सजीव प्रसारण की यह अनूठी पहल है। प्रसारण के दौरान बाबा महाकाल की राजसी सवारी के संपूर्ण मार्ग, विभिन्न पड़ावों, धार्मिक अनुष्ठानों, परंपराओं और श्रद्धालुओं की आस्था का आँखों देखा हाल प्रस्तुत किया जाएगा।
आकाशवाणी उज्जैन की कार्यक्रम प्रमुख अनामिका चक्रवर्ती ने बताया कि इस विशेष कवरेज को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स एवं लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज कराने के लिए नामांकित किया गया है। अनुभवी उद्घोषकों एवं कमेंटेटरों की टीम सवारी की प्रत्येक महत्वपूर्ण गतिविधि का सजीव और भावपूर्ण वर्णन करेगी।
उन्होंने बताया कि इस विशेष प्रसारण का उद्देश्य उज्जैन की समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को देश-विदेश के लाखों श्रोताओं तक पहुंचाना है। जो श्रद्धालु प्रत्यक्ष रूप से राजसी सवारी में शामिल नहीं हो सकेंगे, वे भी रेडियो के माध्यम से घर बैठे बाबा महाकाल की सवारी का दिव्य अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की परिकल्पना के अनुरूप महाकाल की सवारियों में किए गए नवाचारों और आगामी सिंहस्थ की झलक भी इस आयोजन में देखने को मिलेगी। आकाशवाणी की यह पहल बाबा महाकाल की राजसी सवारी को व्यापक स्तर पर जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। श्रद्धालु एफएम 102.5 मेगाहर्ट्ज, न्यूज आन एयर मोबाइल ऐप के माध्यम से प्रसारण सुन सकेंगे। इसके अलावा मोबाइल में गूगल पर आकाशवाणी उज्जैन लाइव सर्च करके भी सजीव प्रसारण से जुड़ा जा सकता है।
सोमवार को निकलेगी भगवान महाकाल की शाही सवारी, सात स्वरूपों में भक्तों को देंगे दर्शन
उज्जैन में श्रावण-भादों मास में निकलने वाली सवारियों के क्रम में अतिम शाही सवारी सोमवार, 07 सितंबर को निकलेगी। इस दौरान अवंतिकानाथ नगर का भ्रमण कर अपनी प्रजा का हाल जानेंगे। सवारी के दौरान बाबा महाकाल भक्तों को सात अलग-अलग रूपों में दर्शन देंगे।
मंदिर प्रबंधन समिति के अनुसार, बाबा महाकाल की राजसी सवारी में रजत पालकी में श्री चन्द्रमौलेश्वर, हाथी पर श्री मनमहेश, गरूड़ रथ पर शिवतांडव, नन्दी रथ पर उमा-महेश और डोल रथ पर होल्कर स्टेट के मुखारविंद, श्री घटाटोप मुखौटा स्वरूप और सप्तम सवारी में श्री सप्तधान का मुखारविंद शामिल रहेगा।
सवारी निकलने से पहले महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान श्री चन्द्रमोलेश्वर की पूजा अर्चना होगी। पूजा के बाद रजत पालकी में सवार होकर भगवान महाकाल प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलेंगे। मंदिर के मुख्य द्वार पर पालकी में विराजित भगवान श्री चन्द्रमोलेश्वर को सशस्त्र सलामी दी जाएगी।
श्री चन्द्रमोलेश्वर की पालकी निर्धारित समय शाम 4 बजे शुरू होकर महाकाल घाटी, गुदरी चौराहा, पानदरीबा, कहारवाड़ी और रामानुजकोट होते हुए रामघाट पहुंचेगी। रामघाट पर पालकी में विराजित भगवान चंद्रमौलेश्वर और गजराज पर आरूढ़ मनमहेश का शिप्रा जल से पूजन-अर्चन किया जाएगा। आरती के बाद सवारी गणगौर दरवाजा, कार्तिक चौक, ढाबा रोड, कमरी मार्ग, टंकी चौक, तेलीवाड़ा, कंठाल, सतीगेट, खड़े हनुमान और गोपाल मंदिर पहुंचेगी। यहां सिंधिया स्टेट की ओर से पूजन के बाद सवारी पटनी बाजार, गुदरी और महाकाल घाटी होते हुए पुनः महाकालेश्वर मंदिर पहुंचेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर