सुपरफूड बनेगा शकरकंद, हाइब्रिड आलू से सशक्त होंगे किसान : शिवराज

युगवार्ता    07-Sep-2026
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केंद्रीय कृषि मंत्री


नई दिल्ली, 07 सितंबर (हि.स.)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि शकरकंद को अब पारंपरिक सोच से बाहर निकालकर एक आधुनिक सुपरफूड के रूप में बड़े पैमाने पर ब्रांडिंग करने की आवश्यकता है, जिससे शहरी और ग्रामीण बाजारों में इसकी मांग बढ़े और छोटे किसानों को उनकी उपज का अधिक से अधिक लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि आगरा नवाहार का हब बनेगा।

चौहान सोमवार को यहां कृषि भवन में अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (सीआईपी) के महानिदेशक डॉ. सिमोन हेक के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत आज कृषि अनुसंधान, खाद्य सुरक्षा और पोषण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इसमें आगरा स्थित दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र की प्रगति, आधुनिक ब्रीडिंग तकनीकों, उन्नत जर्मप्लाज्म और किसानों की आय वृद्धि से जुड़े रणनीतिक मुद्दों पर विस्तृत और सकारात्मक चर्चा हुई। साथ ही इसे नवाचार के हब के रूप में विकसित करने पर भी चर्चा की गयी।

केंद्रीय मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि भारत का विजन अत्यंत व्यापक है। हमारा लक्ष्य केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि हम इस साझेदारी और समन्वय के जरिए पूरी दुनिया की भलाई और वैश्विक आबादी के हित में काम करना चाहते हैं। अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र जैसी वैश्विक संस्थाएं इस वैश्विक सहयोग और समन्वय को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

उन्होंने बैठक में सुझाव देते हुए कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और सीआईपी के कार्यों में किसी भी प्रकार का दोहराव नहीं होना चाहिए। दोनों संस्थाओं के बीच कार्य का स्पष्ट विभाजन हो ताकि संसाधनों की बर्बादी न हो और कुछ नया एवं अनूठा नवाचार निकलकर सामने आए। उन्होंने जोर दिया कि आगरा केंद्र के माध्यम से वैश्विक स्तर का नया और उन्नत जर्मप्लाज्म देश में आना चाहिए, जिससे यहां की कृषि परिस्थितियों के अनुकूल नई किस्में विकसित हों और देश के आलू उत्पादक किसानों को उसका सीधा लाभ मिल सके।

सीआईपी के महानिदेशक डॉ. सिमोन हेक ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह को आश्वस्त किया कि आगरा में स्थापित हो रहा सीसार्क केंद्र पूरे दक्षिण एशिया- विशेषकर भारत, नेपाल, बांग्लादेश और भूटान के लिए एक प्रमुख वैज्ञानिक मंच के रूप में कार्य करेगा। यह केंद्र हाइब्रिड आलू तकनीक, बायोफोर्टिफाइड फसलों और जलवायु-सहिष्णु किस्मों जैसी वैश्विक वैज्ञानिक उपलब्धियों को भारतीय प्राथमिकताओं से जोड़ेगा। इससे आलू की बीज उत्पादन प्रणाली में क्रांतिकारी तेजी और सटीकता आएगी, साथ ही निजी क्षेत्र के निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

बैठक में चर्चा के दौरान शकरकंद (स्वीट पोटैटो) के पोषण और आर्थिक महत्व पर विशेष मंथन किया गया। इसमें तय हुआ कि आयरन, जिंक और विटामिन-ए से भरपूर 'ऑरेंज-फ्लेश्ड' बायोफोर्टिफाइड शकरकंद की उन्नत किस्मों को भारतीय किसानों तक पहुंचाया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शकरकंद को अब पारंपरिक सोच से बाहर निकालकर एक आधुनिक सुपरफूड के रूप में बड़े पैमाने पर ब्रांडिंग करने की आवश्यकता है, जिससे शहरी और ग्रामीण बाजारों में इसकी मांग बढ़े और छोटे किसानों को उनकी उपज का अधिक से अधिक लाभ मिल सके।

चौहान ने सीआईपी के प्रतिनिधिमंडल का भारत आगमन पर स्वागत करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया और भरोसा जताया कि कृषि मंत्रालय, आईसीएआर और सीआईपी का यह साझा प्रयास न केवल भारत और दक्षिण एशिया, बल्कि पूरी दुनिया के कृषि परिदृश्य में एक नया सकारात्मक अध्याय लिखेगा।

बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव अतीश चंद्रा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट और उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थापित हो रहे सीसार्क के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह के अलावा केंद्रीय बागवानी आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के एमडी कपिल मीणा के साथ समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।___________

हिन्दुस्थान समाचार / रामानुज शर्मा

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