डीएफपीडी और एफसीआई ने अनाज प्रबंधन में आधुनिकीकरण को गति देने के लिए किया समझौता

युगवार्ता    08-Sep-2026
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डीएफपीडी और एफसीआई के बीच समझौते का जारी फोटो


डीएफपीडी और एफसीआई के बीच समझौते का जारी फोटो


नई दिल्ली, 08 सितंबर (हि.स.)। खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान में बताया कि नई दिल्ली में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते का मकसद कामकाज की क्षमता को बेहतर बनाना, जवाबदेही को मजबूत करना और देश की अनाज प्रबंधन प्रणाली के आधुनिकीकरण में तेजी लाना है। एमओयू में एफसीआई की कार्यक्षमता और प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए मुख्य प्रदर्शन के मानक तय किए गए हैं।

मंत्रालय ने कहा कि इस समझौते का मकसद कामकाज की क्षमता को बेहतर बनाना, जवाबदेही को मजबूत करना और अनाज प्रबंधन में आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए परफॉर्मेंस-बेस्ड (कामकाज के नतीजों पर आधारित) ढांचा तैयार करना है, जिनमें भंडारण प्रबंधन, क्षमता का उपयोग, गुणवत्ता नियंत्रण, डिजिटलीकरण, तकनीक-आधारित पहल और लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन पर ध्यान दिया गया है।

मंत्रालय के मुताबिक यह समझौता भंडारण घाटे में कमी, भंडारण क्षमता का मनोनुकूल उपयोग, लॉजिस्टिक और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में सुधार के साथ-साथ गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को मजबूत करने सहित प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है। इसके अलावा यह एफसीआई के संचालन की दक्षता, पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाने के लिए व्यावसायिक प्रक्रियाओं के ज्यादा से ज्यादा डिजिटलीकरण और आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी समाधानों को अपनाने पर भी जोर देता है।

समझौता के लक्ष्यों के एक हिस्से को डिपो दर्पण पोर्टल के जरिए एफसीआई के डिपो के निष्पादन से जोड़ा गया है, जो डिपो के बुनियादी ढांचे और संचालन दक्षता का आकलन करने के लिए एक वेब-आधारित प्लेटफॉर्म है।

उल्लेखनीय है कि खाद्य निगम अधिनियम-1964 के तहत 1965 में स्थापित, एफसीआई भारत सरकार की ओर से खाद्यान्नों की खरीद, भंडारण, आवाजाही और वितरण करके देश की खाद्य सुरक्षा को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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