सिनेमा के साथ कश्मीर का बढ़ता जुड़ाव स्थानीय टैलेंट के लिए और मौके पैदा करेगा : इम्तियाज अली

08 Sep 2026 19:22:53

श्रीनगर, 08 सितंबर (हि.स.)। मशहूर फ़िल्ममेकर इम्तियाज़ अली ने मंगलवार को कहा कि कश्मीर में कई ऐसी अनकही कहानियां, किरदार और सांस्कृतिक परम्पराएं हैं, जो फ़िल्ममेकर्स के लिए बेहतरीन कंटेंट बन सकती हैं। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि सिनेमा के साथ इस इलाके का बढ़ता जुड़ाव स्थानीय टैलेंट के लिए और मौके पैदा करेगा।

श्रीनगर के एसकेआईसीसी में 'इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल ऑफ़ जम्मू एंड कश्मीर' के दूसरे दिन मीडिया से बातचीत करते हुए अली ने बताया कि जब भी वह कोई फ़िल्म शूट करते हैं, तो इस इलाके में वापस आने की उम्मीद रखते हैं। उन्होंने कहा कि हम हमेशा उम्मीद करते हैं कि जब भी हम शूट करें, तो कश्मीर वापस आएं। शायद दुनिया में कोई और ऐसी जगह नहीं है जो इतनी सिनेमैटिक हो। 'लैला मजनू' फ़िल्म के बारे में उन्होंने कहा कि यह फ़िल्म कश्मीर से गहराई से जुड़ी हुई है और इसके किरदार और सेटिंग भी इसी इलाके से जुड़े हैं।

उन्होंने कहा कि लैला मजनू कश्मीर पर आधारित फ़िल्म है। इसके किरदार कश्मीर से हैं और फ़िल्म की पूरी सेटिंग और माहौल कश्मीरी है। अली ने कहा कि उन्हें खुशी है कि रिलीज़ के इतने सालों बाद भी यह फ़िल्म कश्मीर में लोकप्रिय बनी हुई है। उन्होंने कहा कि आठ साल बाद भी यह यहां लोकप्रिय है। जब उनसे कश्मीर की उन दूसरी कहानियों के बारे में पूछा गया जो उन्हें आकर्षित करती हैं तो अली ने कहा कि कई ऐसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक हस्तियां हैं, जिनके बारे में वह सिनेमा के ज़रिए बताना चाहेंगे।

उन्होंने कहा कि कश्मीर में कई ऐसे किरदार हैं, जो मुझे आकर्षित करते हैं। मैं हब्बा खातून और कश्मीर के कई अन्य कलाकारों और सूफी संतों से प्रभावित हूँ। मैं उनके बारे में सोचता हूँ और अगर मौका मिला तो मैं निश्चित रूप से उन पर कुछ बनाना चाहूँगा। उन्होंने कहा कि आम कश्मीरी जीवन और संस्कृति के कई पहलुओं पर सिनेमा के ज़रिए पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि कई ऐसी चीज़ें हैं जो सामने नहीं आई हैं। कश्मीर आम तौर पर अपने नज़ारों के लिए मशहूर है लेकिन मुझे कश्मीरी ह्यूमर (हास्य) भी बहुत दिलचस्प लगता है।

अली ने कहा कि यह फ़िल्म फ़ेस्टिवल जम्मू-कश्मीर के बाहर के लोगों को इस इलाके को उस नज़रिए से देखने में मदद कर सकता है, जो उन्होंने अब तक देखा या सुना है, उससे कहीं ज़्यादा। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि फ़िल्म फ़ेस्टिवल का सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि बाहर से लोग यहाँ आएँगे और कश्मीर को अपनी आँखों से देखेंगे। वे यहाँ जो देखेंगे उसे समझेंगे और शायद उसी पर फ़िल्में भी बनाएँगे। उन्होंने आगे कहा कि जब लोग इस इलाके को खुद अनुभव करेंगे तो वे इसे अपने नज़रिए से समझने के लिए काफ़ी क्रिएटिव होंगे।

कश्मीर में हुई 'रॉकस्टार' फ़िल्म की शूटिंग के बारे में बात करते हुए अली ने कहा कि इस इलाके ने सिनेमा पर अपनी एक अलग छाप छोड़ी है। उन्होंने कहा कि कुछ शूटिंग चंदनवाड़ी में हुई थी, लेकिन कश्मीर तो कश्मीर है। इसकी अपनी एक अलग पहचान है।

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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

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