
वडोदरा, 08 सितंबर (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में दुनिया के सामने महाशक्ति बनना है तो देश को इसके लिए मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि एआई में दक्ष युवाओं की जरूरत केवल सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि कृषि, स्वास्थ्य, विनिर्माण और रोबोटिक्स सहित हर क्षेत्र में एआई नए समाधान और रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को एआई के लिए तैयार करने की दिशा में बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है।
‘नमो फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का युवा विशेष कौशल हासिल कर उसका इस्तेमाल एआई के साथ मिलाकर नई तकनीक और समाधान विकसित कर सकता है। कोई युवा कृषि के लिए एआई समाधान तैयार कर सकता है, स्वास्थ्य क्षेत्र में नई तकनीक विकसित कर सकता है, विनिर्माण की उत्पादकता बढ़ा सकता है या अपना रोबोटिक्स स्टार्टअप शुरू कर सकता है। इसलिए भारत और दुनिया के उद्योगों की जरूरतों को समझने तथा एआई का इस्तेमाल करने वाले युवाओं को तैयार करना जरूरी है।
मोदी ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और वैश्विक जरूरतों के साथ शिक्षा और सीखने के तरीके भी बदल रहे हैं। पहले केवल डिग्री पर जोर था, अब कौशल का महत्व भी उतना ही बढ़ गया है। युवाओं के कौशल को लगातार उन्नत करना जरूरी है और इसी उद्देश्य से सरकार शिक्षा नीति तथा शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थानों में बदलाव कर रही है। उन्होंने कहा कि गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों की मेहनत की कमाई बचाने के लिए सरकार छात्रों को देश के श्रेष्ठ शिक्षकों से मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लिए ऐसी कनेक्टिविटी जरूरी है, जो सुगम होने के साथ समय की जरूरत के अनुरूप तेज भी हो। उन्होंने कहा कि वडोदरा गतिशक्ति विश्वविद्यालय का शहर है और आज यहां डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की अंतिम कड़ियां भी जुड़ गई हैं। इसके साथ ही देश में 2,800 किलोमीटर से अधिक लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का काम पूरा हो गया है, जो 21वीं सदी के भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है।
उन्होंने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर 2004 में विचार शुरू हुआ था और 2006 में विशेष कंपनी बनाई गई, लेकिन 2014 तक फाइलें ही एक जगह से दूसरी जगह घूमती रहीं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि इन फाइलों को भी कोई ‘डेडिकेटेड कॉरिडोर’ नसीब नहीं हुआ। फाइलें अटकती, लटकती और भटकती रहीं। मोदी ने कहा कि 2014 के बाद उनकी सरकार ने इस परियोजना को गति दी और आज 2,800 किलोमीटर का काम पूरा कर दिया गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्वी और पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर अब देश के व्यापार और कारोबार की मुख्य आधारशिला बन रहे हैं। इन पर प्रतिदिन 430 से अधिक मालगाड़ियां चल रही हैं। पहले मालगाड़ी को 100 किलोमीटर की दूरी तय करने में करीब साढ़े छह घंटे लगते थे, जबकि अब यही दूरी आधे से भी कम समय में पूरी हो रही है। जहां ट्रक से सामान पहुंचाने में सामान्यतः करीब 30 घंटे लगते हैं, वहीं फ्रेट कॉरिडोर से यह दूरी 10-12 घंटे में पूरी हो जाती है। इससे ईंधन, समय और परिवहन लागत की बचत के साथ पर्यावरण को भी लाभ हुआ है।
मोदी ने हाल में मुंबई के जेएनपीटी बंदरगाह से वडोदरा तक चली डबल-स्टैक कंटेनर मालगाड़ी का उल्लेख करते हुए कहा कि एक बार में 250 से अधिक ट्रकों के बराबर सामान पहुंचाया गया। ट्रक कारोबार को लेकर उठाए जाने वाले सवालों पर उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि ‘नाराज फूफा जी’ पूछेंगे कि ट्रक वालों का क्या होगा लेकिन अब इन ‘फूफा जी’ को भी काम मिल गया है।
उन्होंने कहा कि फ्रेट कॉरिडोर के साथ रेल उन आदिवासी क्षेत्रों तक भी पहुंच रही है, जहां दशकों तक रेल संपर्क नहीं था। गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के ऐसे क्षेत्रों को भी रेल से जोड़ा जा रहा है। मोदी ने कहा कि पहले बजट में एक-दो ट्रेनों की घोषणा होती थी और साल भर उसका ढोल पीटा जाता था, जबकि आज देश में लगातार नई ट्रेनें शुरू हो रही हैं। आज के कार्यक्रम में भी कई नई ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई गई।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष रेल बजट पौने तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक है, जो 12 वर्ष पहले की तुलना में कई गुना अधिक है। रेलवे के आधुनिकीकरण पर हो रहा यह खर्च हजारों-हजार नए रोजगार भी पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद भारत ने करीब 50 हजार आधुनिक रेल कोच बनाए हैं। पिछली सरकार पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, “पुरानी सरकार 10 साल में 50 हजार टॉयलेट नहीं बना सकी थी।”
विनिर्माण क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि भारत अब ‘चिप्स से शिप्स’ तक विनिर्माण की नई गाथा लिख रहा है। देश में केवल अंतिम उत्पाद ही नहीं, बल्कि उसके घटकों और पूरी आपूर्ति श्रृंखला को भारत में विकसित करने की दिशा में काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में फोटोवोल्टिक मॉड्यूल का घरेलू उत्पादन बढ़ा है और अब 200 गीगावाट से अधिक क्षमता विकसित हो चुकी है। इसी आत्मनिर्भरता ने ‘पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना’ का रास्ता तैयार किया है।
उन्होंने बताया कि देश में अब तक 55 लाख परिवार अपनी छतों पर सौर संयंत्र लगा चुके हैं, जिनमें 11 लाख परिवार गुजरात के हैं। इन परिवारों के बिजली उत्पादक बनने से उत्पादन, स्थापना और सेवा क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं और बड़ी संख्या में नए विक्रेता भी सामने आए हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार सौर, पवन, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा सहित सभी ऊर्जा क्षेत्रों पर तेजी से काम कर रही है। भविष्य के आधुनिक क्षेत्र बिजली और विद्युत पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भर होंगे। चिप उद्योग, डेटा सेंटर और एआई जैसे क्षेत्रों के लिए बिजली जीवनरेखा है। इसलिए एआई में वैश्विक महाशक्ति बनने के लिए भारत को मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाना होगा। इसके लिए यूरेनियम तथा महत्वपूर्ण और दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न देशों के साथ समझौते किए जा रहे हैं।
मोदी ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि “झूठ की गूंज से भरमाने वाले हर चौराहे पर मिल जाएंगे, लेकिन भारत का नौजवान सच की हुंकार के साथ चलता है।” उन्होंने कहा कि देश के युवा देख रहे हैं कि सरकार सौर, पवन, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा सहित सभी क्षेत्रों पर कितने फोकस के साथ काम कर रही है।
उन्होंने वडोदरा की शिक्षा, कौशल और उद्योग के बीच लंबे समय से चली आ रही साझेदारी की सराहना करते हुए कहा कि यह शहर 150 वर्षों से इसका प्रतिबिंब रहा है। उन्होंने कहा कि वडोदरा अब देश के पहले ‘मेड इन इंडिया’ सैन्य परिवहन विमान सी-295 के निर्माण के लिए भी जाना जा रहा है और इसकी पहली उड़ान वडोदरा के आसमान को देख चुकी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार