
नई दिल्ली, 08 सितंबर (हि.स.)। बड़ी इमारतों और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के लिए शीशे की बाहरी दिवारों को डिजाइन करने और फिनिस्ट्रेशन सर्विस देने वाली कंपनी ग्लास वॉल सिस्टम्स (इंडिया) लिमिटेड का 427.89 करोड़ रुपये का आईपीओ आज सब्सक्रिप्शन के लिए लॉन्च कर दिया गया। इस आईपीओ में 10 सितंबर तक बोली लगाई जा सकती है। इश्यू की क्लोजिंग के बाद 11 सितंबर को शेयरों का अलॉटमेंट किया जाएगा, जबकि 15 सितंबर को अलॉटेड शेयर डीमैट अकाउंट में क्रेडिट कर दिए जाएंगे। कंपनी के शेयर 16 सितंबर को बीएसई और एनएसई पर लिस्ट हो सकते हैं। लॉन्चिंग के बाद पहले दिन इस आईपीओ को 2.56 गुना सब्सक्रिप्शन मिला है।
इस आईपीओ में बोली लगाने के लिए 172 रुपये से लेकर 182 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है, जबकि लॉट साइज 82 शेयर का है। इस आईपीओ में रिटेल इनवेस्टर्स कम से कम एक लॉट यानी 82 शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं, जिसके लिए उन्हें 14,924 रुपये का निवेश करना होगा। इसी तरह रिटेल इनवेस्टर 1,94,012 रुपये के निवेश से अधिकतम 13 लॉट में 1,066 शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं। इस आईपीओ के तहत दो रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 2,35,10,425 शेयर जारी किए जा रहे हैं। इनमें लगभग 60 करोड़ रुपये के 32,96,703 नए शेयर जारी किए जा रहे हैं, जबकि लगभग 368 करोड़ रुपये के 2,02,13,722 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के जरिये बेचे जा रहे हैं।
इस आईपीओ में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए 50 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व किया गया है। इसके अलावा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 35 प्रतिशत हिस्सा और नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (एनआईआई) के लिए 15 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व है। इस इश्यू के लिए आईआईएफएल कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड को बुक रनिंग लीड मैनेजर बनाया गया है, जबकि एमयूजीएफ इनटाइम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को रजिस्ट्रार बनाया गया है।
ग्लास वॉल सिस्टम्स (इंडिया) लिमिटेड की वित्तीय स्थिति की बात करें, तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत मामूली उतार चढ़ाव के बावजूद लगातार मजबूत बनी रही है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी को 20.25 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 57.51 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का शुद्ध लाभ उछल कर 83.79 करोड़ रुपये हो गया।
इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में भी उतार चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2023-24 में इसे 310.26 करोड़ रुपये का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2024-25 में घट कर 288.14 करोड़ रुपये और 2025-26 में उछल कर 471.43 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। इस अवधि में कंपनी पर लदे कर्ज के बोझ में भी लगातार गिरावट आई। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी पर 24.85 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में घट कर 8.46 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। इसके अगले वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें, तो इस वित्त वर्ष के दौरान कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ और कम होकर 6.68 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।
कंपनी का रिजर्व और सरप्लस भी इस अवधि में लगातार बढ़ता गया। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 101.47 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो वित्त वर्ष वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 158.88 करोड़ रुपये के स्तर पर और 2025-26 में 242.96 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इस अवधि में कंपनी के नेटवर्थ में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी का नेटवर्थ 122.60 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 175.75 करोड़ रुपये के स्तर पर और पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में 261.58 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।
इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2023-24 में 54.70 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 73.01 करोड़ रुपये के स्तर पर और पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में 105.20 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक